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चीन में कुत्ते के माँस पर लगी रोक | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
चीन में ओलंपिक खेलों के दौरान कुत्ते का माँस परोसने पर रोक लगा दी गई है. चीन की सरकारी एजेंसी शिनहुआ का कहना है कि ओलंपिक खेल के दौरान बीजिंग के 112 आधिकारिक रेस्तराँओं में कुत्ते के माँस से बने व्यंजन नहीं मिलेंगे. बीजिंग में जारी किए गए निर्देश में कहा गया है, "कुत्ते का माँस ऑर्डर करने वाले ग्राहकों को विनम्रता से मना कर दिया जाए." सरकार ने यह रोक आधिकारिक ओलंपिक रेस्तराँओं पर लगाई गई है लेकिन ग़ैर आधिकारिक रेस्तराँओं से भी कहा गया है कि वे ओलंपिक के दौरान कुत्ते का माँस बेचने से बचें. सरकारी आदेश में कहा गया है कि अगर किसी ने रेस्तराँ ने कुत्ते के व्यंजन परोसे तो उसे ब्लैकलिस्ट कर दिया जाएगा. चीन में कुत्ते के माँस को 'ख़ुशबूदार माँस' माना जाता है और ऐसी मान्यता भी है कि उसमें औषधीय गुण होते हैं. समाचार एजेंसी के अनुसार यह फ़ैसला विदेशी मेहमानों की भावनाओं को ध्यान में रखकर किया गया है. बीजिंग से बीबीसी के संवाददाता पॉल रेनॉल्ड्स का कहना है कि चीनी सरकार ने ओलंपिक से पहले इस तरह के कई निर्देश जारी किए हैं. चीनी लोगों से पहले ही कहा जा चुका है कि वे तरतीब में क़तार में खड़े होने की आदत डालें, इधर-उधर थूकना बंद करें और चेहरे पर मुस्कान लाएँ. इससे पहले दक्षिण कोरिया ने सोल ओलंपिक के दौरान कुत्ते के माँस से बने व्यंजनों पर रोक लगा दी थी. चीन के अलावा कोरिया, वियतनाम, फिलीपींस और लाओस जैसे दक्षिण पूर्व एशियाई देशों में कुत्ते का माँस खाया जाता है. | इससे जुड़ी ख़बरें कुतिया को बचाने में हज़ारों ख़र्च26 अप्रैल, 2002 | पहला पन्ना अब कुत्ते की बारी29 सितंबर, 2002 | पहला पन्ना फिर भी वह बच गई22 अप्रैल, 2003 | पहला पन्ना महारानी को कुत्ते की मौत का शोक24 दिसंबर, 2003 | पहला पन्ना बिल्ली के लिए 45 हज़ार का हर्जाना10 मई, 2005 | पहला पन्ना कुत्ते को मार डाला गिलहरियों ने02 दिसंबर, 2005 | पहला पन्ना चीन में पचास हज़ार कुत्ते मारने का आदेश01 अगस्त, 2006 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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