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चांगिराई दो महीने बाद ज़िम्बाब्वे लौटे | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ज़िम्बाब्वे के विपक्षी नेता मॉर्गन चांगिराई कई सप्ताह विदेशों में गुज़ारने के बाद हरारे पहुँच गए हैं जहाँ वह राष्ट्रपति के चुनाव में हिस्सा लेने के अभियान की शुरूआत करेंगे. समाचार एजेंसियों ने ख़बर दी है कि ज़िम्बाब्वे में विपक्षी मूवमेंट फ़ॉर डेमोक्रेटिक चेंज यानी एमडीसी के नेता मॉर्गन चांगिराई ने स्वदेश वापसी पर कहा है, "स्वदेश लौटकर अच्छा लग रहा है." मॉर्गन चांगिराई कुछ सप्ताह से दक्षिण अफ्रीका में रह रहे थे. मॉर्गन चांगिराई को पिछले सप्ताहांत स्वदेश लौटना था लेकिन कुछ ऐसी ख़बरें फैल गई थीं कि ज़िम्बाब्वे की सेना ने उनकी हत्या की योजना बना ली थी इस वजह से चेंगराई की वापसी में देरी हुई है. उधर सत्तारूढ़ पार्टी ने विपक्षी पार्टी के इन आरोपों को बिल्कुल निराधार बताया है. पर्यवेक्षकों का कहना है कि 27 जून को दूसरे दौर के मतदान के भी निष्पक्ष होने की संभावना कम ही है. पुलिस हमले ज़िम्बाब्वे के विपक्षी दलों और मानवाधिकार संगठनों ने कहा है कि सैकड़ों विपक्षी कार्यकर्ताओं को पीटा गया है और 29 मार्च को हुए पहले दौर के मतदान के बाद हुई हिंसा में कम से कम 40 लोग मारे जा चुके हैं. जोहनसबर्ग में मौजूद बीबीसी संवाददाता पीटर बिल्स का कहना है कि मॉर्गन चांगिराई ने शनिवार को स्वदेश वापसी के बाद हरारे के एक निजी अस्पताल में उन लोगों से मुलाक़ात की है जो राजनीतिक हिंसा में घायल होने के बाद इलाज करा रहे हैं.
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि ज़िम्बाब्वे की सरकार ने विपक्षी एमडीसी के समर्थकों को परेशान करने का अभियान चलाया हुआ है जिसकी वजह से बहुत से लोगों को अस्पतालों में भर्ती होना पड़ रहा है और अस्पतालों में जगह की कमी हो रही है. राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे की ज़ानू पीएफ़ पार्टी ने ऐसी हिंसक घटनाओं में सरकार का कोई हाथ होने से इनकार किया है और कहा है कि पश्चिमी देश ज़िम्बाब्वे को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं. वर्ष 2007 में मॉर्गन चांगिराई पर पुलिस ने हमला किया था जिसके बाद उनका भी अस्पताल में कुछ दिन तक इलाज हुआ था. उधर रॉबर्ट मुगाबे ने आरोप लगाया है कि एमडीसी पहले दौर का मतदान होने के बाद हिंसक गतिविधियों में शामिल रही है. मॉर्गन चांगिराई पिछले क़रीब दो महीने तक ज़िम्बाब्वे से बाहर रहे हैं और इस दौरान उनका ज़्यादा समय दक्षिण अफ्रीका में बीता है. इस दौरान उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समर्थन हासिल करने की कोशिश की है. ज़िम्बाब्वे के आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार एमडीसी नेता मॉर्गन चांगिराई ने नतीजों में जीत हासिल की थी लेकिन जीत का अंतर इतना बड़ा नहीं था कि वह राष्ट्रपति मुगाबे को पूरी तरह मैदान से हटा सकें. ज़िम्बाब्वे के चुनाव आयोग ने कहा है कि मॉर्गन चेंगराई को 47.9 प्रतिशत वोट मिले जबकि मुगाबे को 43.2 प्रतिशत मत हासिल हुए. | इससे जुड़ी ख़बरें चांगिरई दूसरे चरण के लिए तैयार हुए10 मई, 2008 | पहला पन्ना राष्ट्रपति चुनाव के नतीजों की घोषणा02 मई, 2008 | पहला पन्ना विपक्षी दलों ने सीटें बरकरार रखीं26 अप्रैल, 2008 | पहला पन्ना चांगिराई की स्पष्ट जीत-अमरीका24 अप्रैल, 2008 | पहला पन्ना 'ज़िम्बाब्वे में ख़तरनाक संकट है'20 अप्रैल, 2008 | पहला पन्ना 'मुगाबे को हटाने पर सहमति बनी थी'18 अप्रैल, 2008 | पहला पन्ना ब्रिटेन और विपक्ष की आलोचना18 अप्रैल, 2008 | पहला पन्ना विपक्ष ने लगाए मुगाबे पर गंभीर आरोप05 अप्रैल, 2008 | पहला पन्ना इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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