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'ज़िम्बाब्वे में ख़तरनाक संकट है' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र के पूर्व महासचिव कोफ़ी अन्नान ने ज़िम्बाब्वे के ताज़ा हालात पर फिर चिंता जताई है. उनका कहना है कि ज़िम्बाब्वे मे एक ख़तरनाक संकट है. कोफ़ी अन्नान ने साथ ही ये भी कह दिया कि अफ़्रीकी देशों के नेता इस मामले के समाधान के लिए बहुत कुछ कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया का ध्यान इस मामले पर है. सवाल ये रखा जा रहा है कि ‘आख़िर अफ़्रीकी लोग कहाँ हैं, इस क्षेत्र के देश कहाँ हैं, उनके नेता कहाँ हैं, वो क्या कर रहें हैं. ये एक बहुत ही ख़तरनाक स्थिति है.’ कोफ़ी अन्नान ने कहा कि ये एक ऐसा संकट है जिसका असर ज़िम्बाब्वे के बाहर भी पड़ेगा. नरम रवैया स्पष्ट है कि कोफ़ी अन्नान इस बात को लेकर ख़ासे विचलित हैं कि एक तरफ तो पश्चिमी देश ज़िम्बाब्वे की निंदा कर रहे हैं, वहीं अफ़्रीकी देश इस मामले पर बडा़ ही नरम रवैया अपना रहे हैं. दक्षिण अफ़्रीका के राष्ट्रपति थाबो एंबेकी ने तो यहाँ तक कह डाला कि जिम्बाब्वे में कोई संकट ही नहीं. उधर दक्षिण अफ़्रीकी देशों की बैठक चुनावों के नतीजों को जारी किए जाने की एक कमज़ोर मांग के साथ समाप्त हुई. कोफ़ी अन्नान ने कहा कि वो ज़िम्बाब्वे में कुछ वैसा ही देखना चाहेंगे जैसा कि कीनिया में हुआ. कीनिया में अफ़्रीकी देशों के नेताओं ने मिलकर मामले का समाधान ढूढ निकाला. कीनिया में हज़ारो लोगों की जानें गई. वहाँ पहले प्रतिद्वंदी गुट एक दूसरे के साथ बात करने को तैयार नहीं थे, लेकिन अब वे एक साथ आगे बढ रहे हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें विपक्ष ने लगाए मुगाबे पर गंभीर आरोप05 अप्रैल, 2008 | पहला पन्ना 'मुगाबे को हटाने पर सहमति बनी थी'18 अप्रैल, 2008 | पहला पन्ना ज़िम्बाब्वे में कुछ सीटों पर फिर मतगणना19 अप्रैल, 2008 | पहला पन्ना अन्नान ने अमरीका की आलोचना की11 दिसंबर, 2006 | पहला पन्ना अन्नान ने कीनिया में बातचीत शुरु करवाई30 जनवरी, 2008 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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