BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
सोमवार, 11 दिसंबर, 2006 को 19:59 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
अन्नान ने अमरीका की आलोचना की
कोफ़ी अन्नान
संयुक्त राष्ट्र महासचिव के रूप में अन्नान का यह आख़िरी भाषण था
संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान ने अमरीका से कहा है कि वो अकेले काम करने के बजाए अन्य देशों को भी साथ लेकर चले.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव के रूप में अपने अंतिम भाषण में उन्होंने कहा कि अमरीका को बाक़ी देशों के साथ काम करते हुए अपने नेतृत्व का प्रदर्शन करना चाहिए न कि अकेले काम करते हुए.

अन्नान ने अपने भाषण में कहा, "कोई भी देश दूसरे देशों से ख़ुद को ऊँचा दिखाकर अपने आप को सुरक्षित नहीं रख सकता है."

अन्नान ने कहा कि राष्ट्रों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय, दोनों की स्तरों पर अधिक जवाबदेह बनने की ज़रूरत है और इसे सुनिश्चित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र एकमात्र इकाई है.

उन्होंने कहा कि ग़रीब और कमज़ोर देशों को तो आसानी से जवाबतलब कर लिया जाता है क्योंकि उन्हें बाकी देशों की सहायता की ज़रूरत रहती है पर बड़े और ताकतवर देशों, जिनका अन्य देशों पर ज़्यादा असर पड़ता है, के लिए इसे तय कर पाना मुश्किल होता है.

अन्नान ने इस बारे में कहा कि ऐसे देशों की जनता ही अपने राष्ट्रीय संस्थानों की मदद से इसे सुनिश्चित कर सकती है.

आड़े हाथ अमरीका

उन्होंने यह भी कहा कि अमरीका 'आतंकवाद के ख़िलाफ़ युद्ध' में मानवाधिकारों का सम्मान करना न भूले.

मानवाधिकारों पर अमरीका की भूमिका पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि अमरीका की वैश्विक मानवाधिकार आंदोलन में महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक भूमिका तो रही है पर भविष्य में भी इस दिशा में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए मानवाधिकारों का ईमानदारी से पालन ज़रूरी होगा.

 कोई भी देश दूसरे देशों से ख़ुद को ऊँचा दिखाकर अपने आप को सुरक्षित नहीं रख सकता है

अमरीका को आड़े हाथों लेते हुए अन्नान ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय सैन्य शक्ति के इस्तेमाल को तभी स्वीकार सकता है जब उसे यह विश्वास दिलाया जाए कि सामरिक शक्ति का इस्तेमाल सही मकसद से किया जा रहा है.

उन्होंने यह भी कहा कि सामरिक शक्ति के प्रयोग को वैध ठहराने के लिए यह भी स्थापित करना ज़रूरी है कि ऐसा एक बड़े मकसद के लिए किया गया है और ऐसा करते समय उन नियमों का पालन किया गया है जिन्हें अधिकतर देश मान्यता देते हैं.

अन्नान के तेवर

अन्नान ने अपना यह अंतिम भाषण दिवंगत अमरीकी राष्ट्रपति हैरी एस ट्रूमैन के पुस्तकालय में दिया.

अपने भाषण में अन्नान ने कहा कि अमरीका की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सबसे ऊपर होने की जो स्थिति हैं, वो एक बहुमूल्य अवसर है और इस अवसर का दुनियाभर में लोकतंत्र को प्रभावी बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए.

बीबीसी संवाददाता के मुताबिक अन्नान के इस संबोधन को अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश के लिए एक चुनौती और भर्त्सना के रूप में भी देखा जा सकता है.

संवाददाता के मुताबिक इस अंतिम भाषण के लिए ट्रूमैन के पुस्तकालय को चुनना भी इसका संकेत देती है.

ग़ौरतलब है कि ट्रूमैन संयुक्त राष्ट्र के महासचिव पद की ज़िम्मेदारी भी निभा चुके थे. उन्हें बुश के विपरीत रूप में देखा जाता रहा है और बुश उनके सबसे कड़े आलोचकों में से एक माने जाते रहे हैं.

संयुक्त राष्ट्र

अन्नान ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर संयुक्त राष्ट्र की भूमिका को तो अभूतपूर्व बताया पर कुछ चुनौतियों पर भी बात करने से नहीं चूके.

कोफ़ी अन्नान
अन्नान इराक़ के मसले पर भी अमरीका की नीतियों पर सवाल उठा चुके हैं

उन्होंने विश्व बैंक से लेकर आईएमएफ़ तक विकासशील देशों का प्रतिनिधित्व को प्रभावी बनाने की ज़रूरत है ताकि ये देश अपनी बातों को वहाँ पर मज़बूती के साथ रख सकें.

उन्होंने कहा कि ऐसा ही संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के लिए भी ज़रूरी है क्योंकि सुरक्षा परिषद की वर्तमान स्थिति अभी भी वर्ष1945 की सच्चाई को दिखाती है न की आज की दुनिया की.

अन्नान ने कहा कि इसीलिए वो सुरक्षा परिषद के पुनर्गठन की बात कहते रहे हैं.

उन्होंने कहा कि सुरक्षा परिषद के पुनर्गठन के लिए दो बातों का विशेष ध्यान रखना होगा. पहला तो यह कि दुनिया के अन्य देशों को भी स्थायी रूप से या लंबे समय के लिए जोड़ा जाए ताकि उनकी बात भी प्रभावी तरीके से सामने आ सके.

साथ ही सुरक्षा परिषद के सदस्यों और ख़ासकर प्रमुख ताकतों को अंतरराष्ट्रीय समुदाय के प्रति अपनी विशेष ज़िम्मेदारी समझनी होगी.

विदाई का वक्त

ग़ौरतलब है कि इसी वर्ष 31 दिसंबर को अन्नान का संयुक्त राष्ट्र महासचिव के रूप में कार्यकाल समाप्त हो रहा है.

नए वर्ष में यानी एक जनवरी, 2007 से बान की मून संयुक्त राष्ट्र के नए महासचिव के रूप में कार्यभार स्वीकार करेंगे.

वर्ष 1938 में घाना में जन्मे अन्नान 1997 से संयुक्त राष्ट्र के महासचिव के रूप में कार्यरत हैं.

उन्हें और संयुक्त राष्ट्र को वर्ष 2001 में नोबल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.

इससे जुड़ी ख़बरें
महासचिव के लिए बान की-मून मनोनीत
09 अक्तूबर, 2006 | पहला पन्ना
'इराक़ पर हमला संकट लेकर आया'
13 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>