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ग़ज़ा में सहायता कार्यक्रम पर संकट | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि इसराइल के ग़ज़ा में ईंधन की आपूर्ति रोकने के कारण वह वहाँ अपने सहायता कार्यक्रम को रोकने के लिए मजबूर हो गया है. संयुक्त राष्ट्र की वरिष्ठ अधिकारी एंजेला केन का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र साढ़े छह लाख फ़लस्तीनी शरणार्थियों को खाना देता है और इस काम को रोक देना पड़ेगा. साथ ही नालियों से कचरा इकट्ठा कर फेंकने का काम भी रुक जाएगा जिससे क़रीब पाँच लाख लोग प्रभावित होंगे. हालांकि इसराइल ने ग़ज़ा पट्टी के मुख्य विद्युत केंद्र को ईंधन की आपूर्ति की अनुमति दे दी है. इसके पहले फ़लस्तीनी अधिकारियों ने चेतावनी दी थी कि ईंधन की कमी के कारण बहुत से इलाक़े अंधकार में डूब जाएँगे. यूरोपीय संघ के हस्तक्षेप के बाद इसराइल थोड़े समय के लिए आपूर्ति बहाली के लिए तैयार हो गया है. गंभीर स्थिति इसराइल का कहना है कि फ़लस्तीनी चरमपंथियों के रॉकेट हमलों को रोकने के लिए वो ये क़दम उठा रहा है. जबकि उसके आलोचकों का कहना है कि कुछ चरमपंथियों के हमलों की सज़ा इसराइल पूरे ग़ज़ा में रह रहे फ़लस्तीनियों को दे रहा है. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की इस संकट के विषय में बैठक भी हुई थी लेकिन लीबिया के प्रतिनिधि की टिप्पणी के कारण पश्चिमी प्रतिनिधियों ने बैठक का बहिष्कार कर दिया. उन्होंने लीबियाई प्रतिनिधि के ग़ज़ा की मौजूदा स्थिति की तुलना नाज़ी शिविरों के हालात से करने पर आपत्ति जताई थी. लीबिया ने एक प्रस्ताव का मसौदा तैयार किया है जिसमें ग़ज़ा की मानवीय स्थिति पर गहरी चिंता जताई गई है. |
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