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बाल क्यों गिरते हैं? | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पटना बिहार के अरशद ने पूछा है कि बाल क्यों गिरते हैं और गंजेपन के क्या कारण हैं. पहले आपको ये बता दें कि एक सामान्य व्यक्ति की खोपड़ी में कोई एक लाख रोमकूप होते हैं और हरएक रोमकूप से उसके जीवन काल में कोई 20 बाल निकल सकते हैं. हर बाल एक महीने में कोई एक सेंटीमीटर बढ़ता है. एक वक़्त में सिर के 90 प्रतिशत बाल बढ़ रहे होते हैं जबकि 10 प्रतिशत आराम कर रहे होते हैं. आराम कर रहे बाल दो या तीन महीने के अंदर गिर जाते हैं. इस तरह हर रोज़ हमारे कोई 100 बाल गिर जाते हैं. यानी 100 बालों का गिरना सामान्य है. लेकिन अगर इससे अधिक बाल गिरते हैं तो चिंता होना लाज़मी है. इसके कई कारण हो सकते हैं. जैसे लंबी बीमारी या शल्य चिकित्सा के बाद अधिक बाल गिर सकते हैं. अगर आप अधिक तनाव की स्थिति में हैं तब भी बाल गिरते हैं. अगर आपकी थाइरॉइड ग्रंथि ठीक से काम नहीं कर रही तो उसका असर भी पड़ सकता है. बच्चा पैदा होने के बाद भी कई महिलाओं के बाल गिरने लगते हैं क्योंकि उनके शरीर में हारमोंस का संतुलन बिगड़ जाता है. कई दवाओं के प्रयोग से बाल गिरने लगते हैं जैसे ख़ून को पतला करने वाली दवा, कैंसर के इलाज में प्रयोग होने वाली दवाएं, गर्भनिरोधक दवाएं या ऐंटी डिप्रैसैंट. कई बार फ़ंगस इन्फ़ैक्शन से भी बाल गिरने लगते हैं. प्रतापटांड, शेरपुर, वैशाली बिहार से कृष्ण कांत ठाकुर ने पूछा है कि इस्लाम धर्म के अनुयायी शुक्रवार को पवित्र क्यों मानते हैं. वैसे तो इस्लामी मान्यता के अनुसार सभी दिन एक समान हैं लेकिन शुक्रवार को सैय्यदुल ऐय्याम कहा गया है यानी दिनों का सरदार. यह माना जाता है कि इसी दिन मानव जाति को बनाया गया था और प्रलय यानी क़यामत भी शुक्रवार को ही होगी. जो लोग मर चुके हैं एक बार फिर ज़िंदा किए जाएंगे और ख़ुदा के सामने पेश होंगे. इसे बड़े इश्तमा का दिन बताया गया है. क़ुरआन में सूर ए जुमा है जिसमें लिखा है कि अल्लाह के ज़िक्र की तरफ़ लपक कर जाओ और मिलजुलकर एक जगह एकत्र होकर उसका ज़िक्र करो. जुमा छुट्टी का दिन नहीं है लेकिन जब दोपहर के समय की अज़ान हो तो सभी आर्थिक और सामाजिक गतिविधियाँ छोड़कर अल्लाह के ज़िक्र और नमाज़ के लिए एकत्र होना चाहिए. एक बात और है कि असर और मग़रिब की नमाज़ के बीच, यानी दोपहर बाद और सूर्यास्त की नमाज़ के बीच जो दुआ मांगी जाती है उसे अल्लाह विशेष रूप से क़ुबूल करता है. असित सेन ने कौन-कौन सी फ़िल्मों का निर्देशन किया है. नई दिल्ली से तुषार गुप्ता ने ये सवाल किया है. असित सेन ने अपने फ़िल्म करियर की शुरुआत डी के मेहता के कैमरा असिस्टैंट के रूप में की थी. फिर जाने-माने कैमरामैन रामानंद सेनगुप्ता के सहायक के रूप में काम किया. सबसे पहले उन्होंने असमिया भाषा की फ़िल्म बिप्लबी का निर्देशन किया. उन्होंने कुछ चर्चित बँगला फ़िल्में भी बनाईं. जहाँ तक हिंदी फ़िल्मों का सवाल है तो उन्होंने कई उल्लेखनीय फ़िल्मों का निर्देशन किया जिनमें 1956 में बनी परिवार, 1957 में अपराधी कौन, 1966 में ममता, 1968 में अनोखी रात, 1969 में ख़ामोशी, 1970 में तीन फ़िल्में सफ़र, शराफ़त और माँ और ममता, 1972 में अन्नदाता, 1975 में अनाड़ी, 1976 में बैराग, 1983 में मेहँदी और 1985 में प्रतिज्ञा जो उनकी अंतिम फ़िल्म थी. क्रिकेट टीम के कप्तान को स्किपर क्यों कहा जाता है. यह सवाल किया है जलकौड़ा, खगड़िया बिहार से ख़ालिद नजमी ने. स्किपर, नौका या जहाज़ के कमांडर को कहते हैं. यह कप्तान के बराबर है. स्किपर शब्द डच भाषा के शिपर शब्द से बना है यानी शिप चलाने वाला. समुद्र पर स्किपर जहाज़ का सर्वेसर्वा होता है, उसी की बात मानी जाती है. क्योंकि स्किपर और कप्तान शब्दों का प्रयोग अदल-बदल कर किया जाता है इसलिए क्रिकेट में भी कप्तान की जगह स्किपर शब्द प्रयोग होता है. |
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