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पृथ्वी की अभी कितनी उम्र बाक़ी है | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पृथ्वी की आयु कितनी है और उसका अंत किस वजह से होगा. दिल्ली से यह सवाल किया है आशीष झा ने. वैज्ञानिकों का मत है कि कोई साढ़े चार से पाँच अरब साल पहले जब हमारा सौर मंडल बना, तभी पृथ्वी का जन्म हुआ था और इसका अंत भी उसी से जुड़ा है. जब तक सूर्य है तब तक ये सारे ग्रह उसके चारों ओर घूमते रहेंगे. सूर्य के गर्भ में जो नाभिकीय क्रियाएं चल रही हैं उसी से ऊर्जा पैदा होती है. जब तक यह नाभिकीय ईंधन है तब तक सूर्य चलता रहेगा. जब यह समाप्त हो जाएगा तो सूर्य का विस्तार होगा और वह रैड जायन्ट या लाल दानव बन जाएगा. इतना विशाल कि वह पृथ्वी की कक्षा को भी घेर लेगा. ग्रह मंडल में भारी हलचल मचेगी और पृथ्वी का अंत हो जाएगा. लेकिन वैज्ञानिकों का अंदाज़ा है कि सूर्य अभी पाँच अरब साल तक और जलता रहेगा. येरुशलम येरुशलम मुसलमानों, ईसाइयों और यहूदियों सभी के लिए पवित्र शहर क्यों माना जाता है. यह सवाल किया है मठिया बलिया उत्तर प्रदेश से अजय पांडेय ने. येरुशलम मध्यपूर्व का एक बहुत प्राचीन नगर है. कहते हैं कि दसवीं शताब्दी ईसापूर्व से येरुशलम, यहूदियों के लिए सबसे पवित्र और अध्यात्मिक स्थान रहा है. हीब्रू में लिखी बाइबिल में इस शहर का नाम 700 बार आता है. यहां यहूदियों के महत्वपूर्ण स्थल टैम्पल माउंट और पश्चिमी दीवार हैं. यहूदी दुनिया में कहीं भी हों, येरूशलम की तरफ़ मुंह करके ही उपासना करते हैं. ईसाइयों के लिए भी यह शहर बहुत महत्व रखता है क्योंकि यह शहर ईसा मसीह के जीवन के अंतिम भाग का गवाह है. ईसाइयों का विश्वास है कि ईसा एक बार फिर येरुशलम आएंगे. मुसलमान इसे तीसरा सबसे पवित्र स्थल मानते हैं. उनका विश्वास है कि यहीं से हज़रत मोहम्मद जन्नत की तरफ़ गए थे और अल्लाह का आदेश लेकर पृथ्वी पर लौटे थे. येरुशलम की अल अक्सा मस्जिद और गुम्बदे सख़रा मुसलमानों के पवित्र स्थल हैं. इस समय इस शहर में 1204 सिनेगॉग हैं, 158 गिरजे और 73 मस्जिदें. इसी से अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि यह शहर कितना महत्वपूर्ण है. खरा-खोटा सोना सोने की शुद्धता के लिए कैरेट शब्द का प्रयोग किया जाता है. जैसे 24 कैरेट सोना शुद्ध माना जाता है. यहां 24 का क्या अर्थ हुआ. प्रशान्त घोंगड़े गोकुल ग्राम, बालाघाट मध्य प्रदेश.
जैसा आपने कहा कैरेट शब्द सोने और प्लैटिनम की शुद्धता का माप है. इसके अनुसार एक कैरेट, 24 वां हिस्सा है. अगर 100 ग्राम पदार्थ में 24 वां हिस्सा सोना है तो वह एक कैरेट हुआ. इस हिसाब से 24 कैरेट सोना 99.99 प्रतिशत शुद्ध हुआ, 18 कैरेट सोना 75 प्रतिशत शुद्ध और 12 कैरेट 50 प्रतिशत शुद्ध सोना माना जाता है. सबसे ज़्यादा उपग्रह सबसे अधिक उपग्रह वाला ग्रह कौन सा है. पूछते हैं इलाहबाद उत्तर प्रदेश से विनय कुमार सिंह. सबसे अधिक प्राकृतिक उपग्रहों वाला ग्रह है बृहस्पति. इसके 63 उपग्रह हैं. सौर मंडल के सभी ग्रहों का परिमाण मिलाकर जितना हुआ उसका ढाई गुना परिमाण है बृहस्पति का. शनि के 56 उपग्रह हैं, युरेनस के 27, नैप्च्यून के 13, मंगल के दो, पृथ्वी का 1 और शुक्र और बुध के कोई उपग्रह नहीं है. दिनकर कुम्हारसो, बेगुसराय, से रमेश चंद्र झा रामधारी सिंह दिनकर के बारे में जानना चाहते हैं और यह भी कि उन्हें राष्ट्रकवि क्यों बनाया गया. रामधारी सिंह दिनकर का जन्म बिहार के बेगुसराय ज़िले के सिमरिया गांव में हुआ था. उन्होंने हिंदी, संस्कृत, बँगला, उर्दू और अंग्रेज़ी साहित्य का अध्ययन किया और वे इक़बाल, रवीन्द्रनाथ ठाकुर, कीट्स और मिल्टन जैसे कवियों से बहुत प्रभावित थे. अपनी युवावस्था में उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के विद्रोही अभियान का समर्थन किया लेकिन बाद में गांधी जी के अनुयायी बन गए. उन्हें अपने काव्य उर्वशी के लिए ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला, इसके अलावा उन्हें पद्म भूषण और साहित्य अकादमी पुरस्कार भी मिले. वो एक विद्रोही कवि के रूप में उभरे और उन्होंने राष्ट्रवादी कविताएं लिखीं. इसीलिए उन्हें राष्ट्रकवि माना जाता है. अंकों का खेल बलथरवा, सुपौल बिहार से प्रभात कुमार प्रभाकर ने सवाल किया है कि गणित में 0 से 9 तक अंकों का आविष्कार किसने, कब और किस देश में किया.
कोई भी अंक एक प्रतीक मात्र है, जो किसी गणना या माप का प्रतिनिधित्व करता है. गणना का सबसे पहला उदाहरण दक्षिणी अफ़्रीका की एक गुफ़ा में मिला है, जो ईसा से तीस हज़ार साल पहले का बताया जाता है. इसमें गणना के लिए गुफ़ा की दीवार पर कई लकीरें खिंची हुई हैं. लेकिन गणना के लिए प्रतीकों का प्रयोग बाद में हुआ. कहते हैं भारत के गणितज्ञ पाणिनी ने पांचवी शताब्दी ईसापूर्व अष्टाध्यायी में शून्य का प्रयोग किया था. भारतीय गणितज्ञों ने पाया कि प्रतीकों का प्रयोग करने से गणना करना आसान हो जाता है. यह पद्धति भारत से बाहर कोई नहीं समझता था. फिर नवीं शताब्दी में एक अरबी गणितज्ञ अल-ख़्वारिज़मी ने इसपर एक शोध-प्रबन्ध लिखा जिसका बारहवीं शताब्दी में लातीनी भाषा में अनुवाद हुआ. और इसतरह शून्य से नौ संख्या की यह पद्धति सारी दुनिया में प्रयोग में लाई जाने लगी. चैक गोलपहाड़ी जमशेदपुर से जंगबहादुर सिंह और उमा सिंह ने पूछा है कि बैंकिंग व्यापार में नए प्रकार के चैकों का इस्तेमाल होने लगा है जिन्हे MICR कहते हैं. ये कैसे चैक होते हैं और सामान्य चैकों से कैसे भिन्न हैं. MICR एक तकनोलॉजी है जिसका पूरा रूप है मैग्नैटिक इंक कैरेक्टर रिकग्निशन. इसका प्रयोग चैकों को तेज़ी से छांटने के लिए किया जाता है. भारत में इसका प्रयोग अस्सी के दशक में शुरु हुआ. अगर आप अपने बैंक का चैक ध्यान से देखें तो उसके नीचे की सफ़ेद पट्टी में कुछ अंक लिखे रहते हैं. इसमें नौ अंकों की जो संख्या लिखी रहती है उसमें शहर का कोड, बैंक का कोड और बैंक की शाखा का कोड रहता है. एक खाते से दूसरे खाते में पैसा जमा कराने के लिए ही चैक जारी किए जाते हैं. पहले यह काम हाथ से किया जाता था लेकिन इसमें बहुत वक़्त लगता था. इस तकनोलॉजी के आने के बाद चैकों को छांटने के लिए मशीनों का इस्तेमाल किया जाने लगा. यह मशीन मैग्नैटिक स्याही से लिखे अंक पढ़ लेती है और चैकों की छंटाई का काम तेज़ी से कर लेती है. अब लगभग सभी भारतीय बैंकों के चैकों में इसका उपयोग होता है. |
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