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तुर्की हमले में '79 कुर्द मारे गए' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
तुर्की की सेना का कहना है कि उत्तरी इराक़ स्थित कुर्द छापामारों के ठिकानों पर चल रहे सैन्य अभियान में अब तक उसके पाँच सैनिक और 79 कुर्द छापामार मारे गए हैं. तुर्की सेना की यह कार्रवाई बृहस्पतिवार की रात शुरु हुई थी. इराक़़ ने अपनी सीमा में घुसने के तुर्की की सेना के क़दम पर कड़ा विरोध प्रकट किया है और अमरीका की विदेशमंत्री कॉंडोलीसा राइस ने कहा है कि तुर्की को ऐसा कोई क़दम नहीं उठाना चाहिए जिससे उत्तरी इराक़ में अस्थिरता पैदा हो. तुर्की की राजधानी इस्ताम्बुल में बीबीसी संवाददाता सारा रेन्सफ़र्ड और बग़दाद में बीबीसी संवाददाता जिम म्योर का कहना है कि तुर्की का यह अभियान बेहद दुर्गम और पहाड़ी इलाके में चल रहा है. यहाँ से दोनों पक्षों की तरफ से आ रही जानकारी की फिलहाल कोई निष्पक्ष पुष्टि भी नहीं हो सकती. अभियान के पहले दिन ही तुर्की की सेना ने कुर्द संगठन पीकेके के कई अड्डों को पहचानने और तबाह करने का दावा किया है. सेना ने कहा है कि इस कार्रवाई में कम से कम 79 विद्रोही और 5 तुर्की सैनिक मारे गए हैं और कई घायल हुए हैं. वहीं पीकेके का कहना है कि तुर्की की सेना इराक़ में 15 किलोमीटर अंदर तक घुस आई है और उसके 20 से ज़्यादा सैनिक मारे गए हैं हालाँकि तुर्की ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि इस अभियान में कितने सैनिक भेजे गए हैं, वे कहां तैनात हैं या इसमें कितना समय लगेगा लेकिन कार्रवाई अब भी जारी है. उत्तरी इराक़ को नियंत्रित करने वाले इराक़ी-कुर्द गुट पेश मरगा का कहना है कि अभी तक इस अभियान में कोई आम नागरिक हताहत नहीं हुआ है, वहीं तुर्की प्रधानमंत्री तायेप अर्दोगन ने भी कहा है कि इससे आम इराक़ियों पर कोई असर नहीं पड़ेगा. तुर्की का कहना है, "इस पूरे अभियान का उद्देश्य उत्तरी इराक़ में सिर्फ पीकेके का सफाया करना है. जैसे ही हमारा लक्ष्य पूरा होगा, हमारे सैनिक वापस लौट जाएंगे. हम अपने इराक़ी भाईयों और दोस्तों के ख़िलाफ़ नहीं है और न ही भविष्य में कभी होंगे." लेकिन इराक़ ने तुर्की के इस अभियान पर भारी नाराज़गी जताई है. इराक़ी सरकार ने इराक़ में तुर्की के राजदूत को लिखित रुप में संदेश भेजा है कि तुर्की को इराक़ की संप्रभुता का सम्मान करना चाहिए. इराक़ के विदेश मंत्री होशयार ज़ेबारी ने बीबीसी को बताया है कि तुर्की का अभियान अपनी हद पार कर गया है, "हमारी धरती पर पिछले दो महीनों से लगातार बमबारी हो रही है. तुर्की की सेना पीकेके के संदिग्ध अड्डों को लगातार निशाना बना रही है लेकिन किसी दूसरे देश में अपने सैनिक भेजना तो साफ़-साफ़ लड़ाई बढ़ाने वाली बात है." लेकिन इस अभियान को लेकर अमरीका, यूरोपीय संघ और सयुंक्त राष्ट्र – सभी ने चिंता जताई है हालांकि अमरीका ने तुर्की की इस कार्रवाई का समर्थन किया है लेकिन इसके बाद भी वह यह सोचना बंद नहीं कर सकता कि इस अभियान का इराक़ की स्थिरता पर क्या असर पड़ सकता है. तुर्की के बार बार आश्वासन देने के बावजूद अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में हलचल देखी गई और तेल का भाव बढ़ गया है. | इससे जुड़ी ख़बरें तुर्की सैनिक 'इराक़ में दाख़िल हुए'18 दिसंबर, 2007 | पहला पन्ना उत्तरी इराक़ में तुर्की का हवाई हमला16 दिसंबर, 2007 | पहला पन्ना तुर्की की संभावित कार्रवाई रोकने के प्रयास23 अक्तूबर, 2007 | पहला पन्ना इराक़ी ज़मीन से हमले नहीं सहेगा तुर्की21 अक्तूबर, 2007 | पहला पन्ना तुर्की सीमा पर झड़प, 42 की मौत21 अक्तूबर, 2007 | पहला पन्ना तुर्कीः कुर्द इलाक़ो पर हमले को मंज़ूरी18 अक्तूबर, 2007 | पहला पन्ना तुर्की के महिला संगठन ख़फ़ा हैं...03 अक्तूबर, 2007 | पहला पन्ना तुर्की की संसद में कुर्दों को मिली जगह04 अगस्त, 2007 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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