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तुर्की सेना के हमले में कई हताहत | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
तुर्की की सेना ने कहा है कि उत्तरी इराक़ में कुर्द विद्रोहियों के ख़िलाफ़ उसके अभियान में पाँच सैनिक और कई कुर्द विद्रोही मारे गए हैं. तुर्की सेना का कहना है कि गुरुवार को वह उत्तरी इराक़ की सीमा में दाखिल हुई और उन कुर्द विद्रोहियों के ख़िलाफ़ अभियान चला रही है जिन्होंने उस इलाक़े में पनाह ले रखी है. तुर्की के प्रधानमंत्री रीसेप ताइप एर्दोगन का कहना है कि सैन्य अभियान सीमित इलाके में है और सेना जितनी जल्दी संभव होगा, वापस लौट आएगी. संयुक्त राष्ट्र महासचिव और अमेरिका ने तुर्की से अभियान के दौरान सहनशीलता बरतने का आग्रह किया है. अपुष्ट दावे तुर्की सेना के एक बयान में कहा गया है, "प्रारंभिक सूचना के आधार पर माना जा रहा है कि हवाई हमलों और राकेट हमलों में बड़ी संख्या में कुर्द विद्रोही मारे गए हैं." इससे पूर्व, कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी (पीकेके) के प्रवक्ता अहमद दनास ने कहा था कि लड़ाई में दो तुर्क सैनिक मारे गए हैं और आठ घायल हुए हैं. हालाँकि दोनो ही रिपोर्टों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है. तुर्की सेना की घोषणा के मुताबिक सरहद पार इराक़ में कुर्द विद्रोही गुट पीकेके के अड्डों पर हवाई हमले किए जा रहे हैं.
तुर्की की सेना ने कहा है कि उसका उद्देश्य उत्तरी इराक में सिर्फ पीकेके का सफ़ाया करना है और जैसे ही यह लक्ष्य पूरा हो जाएगा, तुर्की के सैनिक वापस लौट जाएंगे. तुर्की की सेना ने इस जानकारी पर कोई रौशनी नहीं डाली है कि इस अभियान में कितने सैनिक शामिल हैं या वे किन इलाकों को निशाना बना रहे हैं. अजीब वक़्त इस अभियान में इराकी-कुर्द अधिकारियों या फिर अमरीका का कोई हाथ है या नहीं यह स्पष्ट नहीं हो सका है, लेकिन यह अभियान चलाने का यह बहुत ही अजीब समय है. पिछले कुछ समय से पीकेके ने तुर्की में कोई हमला नहीं किया है और मौसम के हिसाब से भी इस वक़्त सरहदी इलाका बर्फ़ से ढका हुआ है. इस सब के बावजूद दुनिया की नज़रें इसी बात पर टिकी हैं कि तुर्की के इस अभियान का क्या अंजाम निकलता है. तुर्की और उत्तरी इराक़ के बीच की सरहद काफी संवेदनशील है और साथ ही तुर्की, इराक़ और अमरीका के बीच बहस का एक गंभीर सबब भी. तुर्की लंबे समय से शिकायत कर रहा है कि इराक की सरकार ने पीकेके से निपटने के लिए और ठोस क़दम नहीं उठाए हैं. तुर्की का कहना है कि ये कुर्द लड़ाके तुर्की में घुसकर बराबर हमले करते आ रहे हैं. अमरीका तुर्की की हिमायत करता आया है लेकिन इस मामले में वह अभी तक शायद तय नहीं कर पाया है कि इन सैनिक अभियानों से इराक़ की स्थिरता को कोई ख़तरा है या नहीं. मुक्तदा अल सद्र वहीं इराक में शिया नेता मुक्तदा अल सद्र की मेहदी सेना ने शुक्रवार को देश की परिस्थितियों को देखते हुए संघर्ष-विराम को बरक़रार रखने का फ़ैसला किया है. महदी सेना ने अगस्त 2007 में छह महीनों के लिए सभी कार्रवाइयों को रोकने का फैसला किया था. इससे पहले कट्टरपंथी शिया नेता मुक्तदा अल सद्र नेता की मेहदी सेना अक्सर अमरीकी सैनिकों के साथ संघर्ष कर रही थी. छह महीनों की मियाद ख़त्म होने पर इस बात पर सबकी नज़रें थीं कि मेहदी सेना अब क्या फ़ैसला करती है. शिया नेता के आदेश पर नमाज़ियों के बीच सीलबंद लिफ़ाफ़े बाँटे गए और कहा गया कि उन्हें नमाज़ के वक़्त खोला जाए. लिफ़ाफ़ों में संदेश दिया गया कि मेहदी सेना को इराक़ में एक सैद्धांतिक मुक़ाम तक पहुँचने के लिए एक मौक़ा चाहिए जिसकी वजह से इस संघर्ष-विराम को आगे बढाया जा रहा है. ज़ाहिर है कि इस ऐलान से इराक़ सरकार और अमरीकी बलों ने राहत की साँस ली है. | इससे जुड़ी ख़बरें तुर्की सैनिक 'इराक़ में दाख़िल हुए'18 दिसंबर, 2007 | पहला पन्ना उत्तरी इराक़ में तुर्की का हवाई हमला16 दिसंबर, 2007 | पहला पन्ना तुर्की की संभावित कार्रवाई रोकने के प्रयास23 अक्तूबर, 2007 | पहला पन्ना इराक़ी ज़मीन से हमले नहीं सहेगा तुर्की21 अक्तूबर, 2007 | पहला पन्ना तुर्की सीमा पर झड़प, 42 की मौत21 अक्तूबर, 2007 | पहला पन्ना तुर्कीः कुर्द इलाक़ो पर हमले को मंज़ूरी18 अक्तूबर, 2007 | पहला पन्ना तुर्की के महिला संगठन ख़फ़ा हैं...03 अक्तूबर, 2007 | पहला पन्ना तुर्की की संसद में कुर्दों को मिली जगह04 अगस्त, 2007 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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