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पश्चिम के साथ तनाव नहीं: करज़ई | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने इस बात से इनकार किया है कि विदेशी सैनिकों की भूमिका को लेकर पश्चिमि देशों के साथ किसी तरह का तनाव है. उन्होंने राजधानी काबुल में पत्रकारों से कहा कि वो नैटो देशों के आभारी हैं जिन्होंने अपनी सेना यहाँ भेजी है. इस बीच अमरीकी विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस और ब्रिटिश विदेश मंत्री डेविड मिलिबैंड काबुल पहुँचे और करज़ई से मुलाक़ात की. दोनों नेता उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नैटो) के दूसरे सदस्य देशों से अफ़ग़ानिस्तान में और सैनिक भेजने की माँग करते रहे हैं. कोंडोलीज़ा राइस ने कहा कि चरमपंथियों के ख़िलाफ़ लड़ाई में सफलताएँ मिली हैं लेकिन काम अभी अधूरा है. डेविड मिलिबैंड का कहना था कि तालेबान की हार हो रही है लेकिन अभी लंबा सफर तय करना है. दोनों नेताओं ने हिंसाग्रस्त कंधार का दौरा किया और वहाँ नैटो कमांडरों से बातचीत की. इससे पहले नैटो के महासचिव याप डा हूप स्केफ़र ने संकेत दिए थे कि यदि नैटो अफ़ग़ानिस्तान में असफल रहता है तो पश्चिमी देशों पर 'आतंकवादी' हमले हो सकते हैं. उनका कहना है कि अफ़ग़ानिस्तान में 'आतंकवाद के ख़िलाफ़' जंग में प्रगति हो रही है लेकिन कई बड़ी चुनौतियों अब भी बाक़ी हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें 'नाकामी के गंभीर नतीजे हो सकते हैं'07 फ़रवरी, 2008 | पहला पन्ना 'अफ़ग़ानिस्तान के कारण नैटो पर ख़तरा'07 फ़रवरी, 2008 | पहला पन्ना अमरीका ने जर्मनी से और सैनिक मांगे01 फ़रवरी, 2008 | भारत और पड़ोस 'अफ़ग़ानिस्तान की स्थिति चिंताजनक'30 जनवरी, 2008 | भारत और पड़ोस अफ़ग़ानिस्तान में अतिरिक्त तैनाती16 जनवरी, 2008 | भारत और पड़ोस 'रिश्वत' देकर छूट गया तालेबान कमांडर08 जनवरी, 2008 | भारत और पड़ोस तालेबान के ख़िलाफ़ नैटो की लामबंदी22 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस अफ़ग़ानिस्तान को लेकर अमरीकी चेतावनी14 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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