|
'अफ़ग़ानिस्तान के कारण नैटो पर ख़तरा' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी रक्षामंत्री रॉबर्ट गेट्स ने चेतावनी दी है कि अफ़ग़ानिस्तान में ज़्यादा सैनिक सुरक्षा मुहैया कराने के मुद्दे पर नैटो संगठन पर टूट का ख़तरा मंडरा रहा है. उन्होंने कहा है कि हो सकता है कि नैटो द्विस्तरीय संस्था बन जाए. उन्होंने कहा है कि यदि अफ़ग़ानिस्तान में विद्रोह से निपटने के लिए पड़ रहे बोझ को बाँटने के लिए सभी सदस्य देश सहायता नहीं बढ़ाएँगे तो इस लड़ाई का मक़सद ही ख़त्म हो जाएगा. हालांकि नैटो के महासचिव ने कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान के विफल राज्य बनने की चेतावनी के बीच नैटो की सेना वहाँ सफल हो रही है. इस बीच अमरीकी विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस और ब्रितानी विदेश मंत्री डेविड मिलबैंड अफ़ग़ानिस्तान का दौरा कर रहे हैं. संभावना है कि वे राष्ट्रपति हामिद करज़ई से बात करेंगें और अपने देशों के सैनिकों से मुलाक़ात भी करेंगे. तैनाती अमरीका ने हाल ही में जर्मनी की निंदा की थी क्योंकि वह तालेबान के ख़िलाफ़ चल रहे युद्ध के लिए सैन्य सहायता बढ़ाने के लिए राज़ी नहीं था. हालांकि रॉबर्ट गेट्स की टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब जर्मनी ने उत्तरी अफ़ग़ानिस्तान में 200 और सैनिक भेजने की घोषणा कर दी है. हालांकि जर्मनी ने अपने सैनिक उत्तरी अफ़ग़ानिस्तान के मज़ार-ए-शरीफ़ भेजने की बात कही है और कहा है कि अगर ज़रूरत पड़े तो उन्हें दूसरे इलाक़ों में स्थानांतरित किया जा सकता है. जबकि अफ़ग़ानिस्तान के दक्षिणी हिस्से में स्थिति ज़्यादा ख़राब है और अमरीका वहाँ और सैनिकों की ज़रुरत बता रहा है. दक्षिण में अमरीका, ब्रिटेन, कनाडा और नीदरलैंड्स की फ़ौजों ने कमान संभाल रखी है. दरार पिछले हफ़्ते अमरीकी सरकार ने यूरोपीय देशों को एक पत्र भेजा था जिसमें दक्षिणी अफ़ग़ानिस्तान में और सैनिक भेजने की ज़रुरत बताई गई थी. नैटो के सभी 26 सदस्य देशों ने अफ़ग़ानिस्तान में संघर्ष कर रही संयुक्त कमान सेना के लिए सैन्य सहायता दी है.
लेकिन अमरीका के कई सहयोगी देश, जिसमें जर्मनी, फ़्रांस, स्पेन, तुर्की और इटली ने दक्षिणी अफ़ग़ानिस्तान में बड़ी संख्या में फ़ौज भेजने से इनकार कर दिया है. उनके इस निर्णय ने उनके और अमरीका, ब्रिटेन, कनाडा, नीदरलैंड्स, डेनमार्क और रोमानिया के बीच दरार पैदा कर दी है. इन देशों को अफ़ग़ानिस्तान में सबसे ज़्यादा नुक़सान उठाना पड़ा है. सदस्य देशों के इनकार करने के बाद हाल ही रॉबर्ट गेट्स को बेमन से 3,200 अमरीकी सैनिकों को अफ़ग़ानिस्तान भेजना पड़ा था. रॉबर्ट गेट्स ने अमरीकी संसदीय समिति से कहा है कि वह इस मामले पर प्रयास जारी रखेंगे और गुरूवार को लुथियाना की राजधानी विलनियस में नैटो रक्षामंत्रियों की अनौपचारिक बैठक में भी इस विषय पर चर्चा होगी. | इससे जुड़ी ख़बरें अमरीका ने जर्मनी से और सैनिक मांगे01 फ़रवरी, 2008 | भारत और पड़ोस 'अफ़ग़ानिस्तान की स्थिति चिंताजनक'30 जनवरी, 2008 | भारत और पड़ोस अफ़ग़ानिस्तान में अतिरिक्त तैनाती16 जनवरी, 2008 | भारत और पड़ोस 'रिश्वत' देकर छूट गया तालेबान कमांडर08 जनवरी, 2008 | भारत और पड़ोस तालेबान के ख़िलाफ़ नैटो की लामबंदी22 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस अफ़ग़ानिस्तान को लेकर अमरीकी चेतावनी14 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस नैटो को और संसाधन मिलेंगे25 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||