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सोमवार, 10 दिसंबर, 2007 को 15:33 GMT तक के समाचार
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आईपीसीसी-गोर को नोबेल पुरस्कार
पचौरी-गोर
आईपीसीसी और अल गोर को संयुक्त रूप से नोबेल पुरस्कार मिला
जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र के पैनल आईपीसीसी (इंटरगर्वन्मेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज) और अमरीका के पूर्व उपराष्ट्रपति अल गोर को संयुक्त रूप से नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया है.

आईपीसीसी की ओर से समिति के अध्यक्ष डाक्टर राजेन्द्र पचौरी ने पुरस्कार ग्रहण किया.

डॉक्टर पचौरी ने पुरस्कार ग्रहण करने के बाद अपने भाषण में कहा," जलवायु परिवर्तन के ख़तरों को कम करने के लिए समन्वित अंतरराष्ट्रीय प्रयास की ज़रूरत है और इसमें भारतीय सभ्यता की सीखों को अपना कर सफलता पाई जा सकती है."

उन्होंने कहा, ''मैं भारत का हूँ. वो देश जिसने सभ्यताओं को जन्म दिया. वो देश जहाँ प्राचीन परंपरा और पुरखों की दी हुई सीख आज भी समाज को निर्देशित करती है. भारतीय वसुधैव कुटुम्बकम का दर्शन दुनिया को जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों से बचाने के अंतरराष्ट्रीय प्रयासों के केन्द्र में होना चाहिए. ये नीति मौजूदा विश्व में शांति और व्यवस्था कायम रखने में अहम भूमिका निभा सकती है, और भविष्य में तो ये नीति कहीं ज़्यादा प्रभावी होगी.''

जलवायु परिवर्तन

 ''मैं भारत का हूँ. वो देश जिसने सभ्यताओं को जन्म दिया. वो देश जहाँ प्राचीन परंपरा और पुरखों की दी हुई सीख आज भी समाज को निर्देशित करती है. भारतीय वसुधैव कुटुम्बकम का दर्शन दुनिया को जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों से बचाने के अंतरराष्ट्रीय प्रयासों के केन्द्र में होना चाहिए. ये नीति मौजूदा विश्व में शांति और व्यवस्था कायम रखने में अहम भूमिका निभा सकती है
राजेन्द्र पचौरी

डॉक्टर पचौरी के साथ संयुक्त रूप से नोबेल शांति पुरस्कार पाने वाले पूर्व अमरीकी उपराष्ट्रपति अल गोर ने भी अपने भाषण में ग्लोबल वार्मिंग के ख़िलाफ़ सामूहिक प्रयासों पर बल दिया.

अल गोर का कहना था, ''धरती को बुखार है. और बुखार बढ़ता ही जा रहा है. विशेषज्ञों से पूछने पर पता चला कि धरती ख़ुद इस परेशानी से छुटकारा नहीं पा सकती. हमने विशेषज्ञों से दूसरी बार राय ली, तीसरी बार राय ली. हर बार उनका एक ही जवाब आया कि धरती के पर्यारण की बिगड़ी दशा के मूल में कुछ बुनियादी गड़बड़ियाँ हैं. ये गड़बड़ियाँ हमारे कारण हुई हैं, इसलिए इसे ठीक करने की ज़िम्मेवारी भी हमारी ही है.''

उधर इंडोनेशिया के बाली में चल रहे जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र ने एक रिपोर्ट जारी की है जिसके अनुसार जलवायु परिवर्तन के कारण अफ्रीका और एशिया में तनाव हो सकता है और नतीजतन युद्ध भी हो सकता है.

रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि दक्षिण एशिया में ख़ासकर भारत पाकिस्तान और बांग्लादेश में जलवायु परिवर्तन युद्ध जैसी स्थिति पैदा कर सकता है क्योंकि इन इलाक़ों में ग्लेशियरों के टूटने के कारण पानी की कमी हो रही है और लोगों की दिक्कतें बढ़ रही हैं.

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