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शुक्रवार, 12 अक्तूबर, 2007 को 16:27 GMT तक के समाचार
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'नोबेल की बिल्कुल उम्मीद नहीं थी'
आईपीसीसी में तीन हज़ार वैज्ञानिक पचौरी के सहकर्मी हैं
जलवायु परिवर्तन के मामले में दुनिया भर में अभियान चलाने वाले अमरीका के पूर्व उप राष्ट्रपति अल गोर के साथ ही संयुक्त राष्ट्र के संगठन आईपीसीसी (इंटरगर्वन्मेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज) नोबेल शांति पुरस्कार देने की घोषणा की गई है.

आईपीसीसी के अध्यक्ष भारत के पर्यावरण वैज्ञानिक आरके पचौरी हैं और वे संगठन की ओर से यह सम्मान ग्रहण करेंगे.

दिल्ली में बीबीसी संवाददाता पल्लवी जैन ने उनसे ख़ास बातचीत की.

आपकी संस्था आईपीसीसी को यह सम्मान मिला है, क्या सोचते हैं इस निर्णय के बारे में?

इस फ़ैसले से स्पष्ट हो गया है कि नोबेल सम्मान समिति मानती है कि जलवायु परिवर्तन इस समय दुनिया की एक बहुत बड़ी समस्या है. नोबेल सम्मान समिति को लगता है कि इस समस्या को अगर हल करना है तो इसके लिए ज्ञान-विज्ञान की बहुत आवश्यकता होगी. आईपीसीसी उसी ज्ञान से जुड़ा हुआ है और उसका सम्मान इसी प्रयास की सराहना है.

विकास और पर्यावरण संरक्षण दोनों एक साथ कैसे चल सकते हैं, अक्सर विकासशील और विकसित देशों के बीच तकरार दिखाई देती है.

इसके लिए ऐसा रास्ता निकालना होगा कि प्रकृति को नुक़सान पहुँचाए बिना विकास हो सके. विकासशील देशों को सोचना होगा कि वे किस हद तक विकसित देशों के ढर्रे पर चल सकते हैं और किस हद तक उनकी ग़लतियों को दोहराने से बच सकते हैं. अब समय आ गया है कि इस समस्या का हल निकालने के लिए बहुत मशक्कत करनी पड़ेगी ताकि ऐसा संतुलित रास्ता निकल सके.

जलवायु परिवर्तन से सभी प्रभावित होते हैं, यह सीमाओं से परे है, ग्लोबलाइज़ेशन के इस दौर में क्या अब लोग सीमाओं से ऊपर उठकर इस गंभीर समस्या के बारे में सोचेंगे?

बिल्कुल, इसका असर सबके ऊपर पड़ेगा, यह उदारता के रूप में किया जाने वाला काम नहीं है, यह अपने भले के लिए किया जाने वाला काम है. जलवायु परिवर्तन से निबटना सबके हित में है.

क्या आपने उम्मीद की थी कि आपको यह सम्मान मिलेगा?

कभी नहीं सोचा था, मुझे ज़रा भी खयाल नहीं था कि आईपीसी को यह सम्मान मिलेगा. मेरा दिमाग़ में कभी यह बात नहीं आई कि मुझे भी कोई पहचान मिलेगी.

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