|
स्वतंत्र मीडिया पर अलग अलग राय | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बीबीसी वर्ल्ड सर्विस के एक सर्वेक्षण के अनुसार दुनिया भर के लोगों में स्वतंत्र मीडिया के महत्व को लेकर राय अलग अलग है. सर्वेक्षण के दौरान जितने लोगों से बात की गई उनमें से 56 प्रतिशत लोगों का कहना है कि स्वतंत्र मीडिया एक स्वतंत्र समाज के लिए ज़रुरी है जबकि 40 प्रतिशत लोगों की राय में सामाजिक सौहार्द्र और शांति के लिए मीडिया की स्वतंत्रता पर अंकुश भी होना चाहिए. सर्वेक्षण के दौरान 14 देशों के 11, 344 लोगों से बातचीत की गई. इन सभी देशों में सामाजिक स्थायित्व से अधिक महत्व मीडिया की स्वतंत्रता को दिया गया. मीडिया की आज़ादी का समर्थन करने वालों में सबसे आगे रहे अमरीका और पश्चिमी यूरोप के लगो जहां 70 प्रतिशत लोगों के लिए प्रेस की आज़ादी पहले आती थी. दूसरी तरफ भारत, सिंगापुर और रुस में अधिकतर लोगों ने समाज के स्थायित्व को प्रेस की आज़ादी से अधिक महत्व दिया. इन देशों में 48 प्रतिशत लोगों का कहना था कि देश में शांति और स्थायित्व के लिए मीडिया की आज़ादी पर अंकुश ज़रुरी है. भारत में 72 प्रतिशत लोगों का कहना था कि देश में मीडिया स्वतंत्र है जबकि सिंगापुर में मात्र 36 लोग मानते थे कि उनके यहां मीडिया आज़ाद है. कुछ विकसित देशों में लोग अपने देशों की मीडिया के बारे में बहुत आलोचनात्मक रवैया अपनाया. अमरीका, ब्रिटेन और जर्मनी में सिर्फ 29 प्रतिशत लोगों का कहना था कि उनके देश की मीडिया ख़बरों की सही ढंग से रिपोर्टिंग कर रही है. ब्राज़ील, मेक्सिको, अमरीका और ब्रिटेन में 70 प्रतिशत लोगों ने मीडिया के मालिकाना हक को लेकर चिंता जताई. उनका मानना था कि समाचारों की कवरेज़ में मालिकों का राजनीतिक रुख सामने आता है. अधिकतर देशों में निजी मीडिया के बारे में लोगों की राय बहुत अच्छी नहीं दिखी. हालांकि सिर्फ मिस्र, जर्मनी और रुस में ही लोगों ने सरकारी मीडिया को निजी मीडिया से बेहतर क़रार दिया. बीबीसी वर्ल्ड सर्विस के लिए यह सर्वेक्षण अंतरराष्ट्रीय रिसर्च फर्म ग्लोबस्कैन और सायनोवेट ने किया था. | इससे जुड़ी ख़बरें अरब मीडिया में होड़27 मार्च, 2003 | पहला पन्ना पाकिस्तान में मीडिया पर हमलों पर चिंता27 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस एओएल ने भारत में पोर्टल उतारा26 अप्रैल, 2007 | कारोबार मुशर्रफ़ ने मीडिया पर लगाम कसी04 जून, 2007 | भारत और पड़ोस वॉल स्ट्रीट ख़रीदने की कोशिश में मरडॉक 31 जुलाई, 2007 | कारोबार बदलाव के दौर से गुज़र रहा है भारतीय मीडिया16 अगस्त, 2007 | भारत और पड़ोस गुजरातः चुनावों से पहले दंगों की ख़बर26 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||