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मंगलवार, 20 नवंबर, 2007 को 14:01 GMT तक के समाचार
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इराक़ी पत्रकार पर चलेगा मुक़दमा
बिलाल हुसैन
बिलाल हुसैन एपी की उस फ़ोटो टीम के सदस्य हैं जिसने 2005 में पुलित्ज़र पुरस्कार जीता था
अमरीकी सेना का कहना है कि वह इराक़ी चरमपंथियों की मदद करने के संदेह में वर्ष 2006 में हिरासत में लिए गए एसोसिएटेड प्रेस (एपी) के फ़ोटोग्राफ़र बिलाल हुसैन के ख़िलाफ़ आपराधिक मुक़दमा चलाने की सिफ़ारिश करेगी.

अमरीकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन का कहना है कि उसके हाथ कुछ सबूत लगे हैं जिनसे साबित होता है कि बिलाल हुसैन ‘चरमपंथियों’ से जुड़े हुए थे और वह समाचार एजेंसी एपी में घुसने में सफल रहे थे.

इस मामले को इराक़ी न्यायाधीशों के सुपुर्द किया गया है जो यह फैसला करेंगे कि बिलाल हुसैन के ख़िलाफ़ मुक़दमा शुरू किया जाए या नहीं.

इस बीच एपी का कहना है कि उसकी ख़ुद की जाँच में ऐसा कुछ प्रमाण नहीं मिला है जिससे ये साबित होता हो कि बिलाल हुसैन इराक़ी पत्रकार के अलावा और कुछ हैं.

विश्वसनीय नहीं

समाचार एजेंसी के वकीलों का कहना है कि वे बिलाल हुसैन से मुलाक़ात नहीं कर पा रहे हैं और उनके ख़िलाफ़ पेश किए गए सबूत बिलाल के क़ानूनी बचाव को असंभव बनाते जा रहे हैं.

बिलाल हुसैन एपी की उसी फ़ोटो टीम के सदस्य हैं जिसने 2005 में पुलित्ज़र पुरस्कार जीता था.

 अमरीकी गठबंधन सेना के पास इस बात के पक्के सबूत हैं कि बिलाल चरमपंथी गतिविधियों से जुड़े होने के कारण सुरक्षा और स्थिरता के लिए ख़तरा है
मोरेल, प्रेस सचिव, पेंटागन

अमरीकी अधिकारियों का कहना है कि उन्हें बिलाल की गतिविधियों पर पहले-पहल तब शक हुआ जब वह अक्सर चरमपंथी हमलों के घटनास्थल पर मौजूद होते थे. उन पर अपने घर में कुछ अजनबियों को शरण देने का भी आरोप था.

एपी का कहना है कि बिलाल को फलूजा में बम विस्फोट की घटना के बाद अप्रैल 2006 में उनके घर से हिरासत में लिया गया था.

बाद में अमरीकी सैनिक वहाँ पहुँचे और उनके फ्लैट को निगरानी चौकी के रूप में इस्तेमाल करने लगे.

सैनिकों ने बिलाल हुसैन और उनके मेहमानों को संदिग्ध चरमपंथियों के रूप में हिरासत में रखा. इसके अलावा बिलाल के लैपटॉप कंप्यूटर और टेलीफ़ोन को भी ज़ब्त कर लिया गया.

पेंटागन के प्रेस सचिव ज्योफ मोरेल ने कहा, "अमरीकी गठबंधन सेना के पास इस बात के पक्के सबूत हैं कि बिलाल हुसैन चरमपंथी गतिविधियों से जुड़े होने के कारण सुरक्षा और स्थिरता के लिए ख़तरा है."

अमरीकी सेना ने इससे पहले कहा था कि बिलाल को बम बनाने, चरमपंथ को प्रचारित करने और अमरीकी सेना की जासूसी करने के आरोप में हिरासत में लिया गया है.

हालाँकि अमीरीकी सेना ने बिलाल के ख़िलाफ़ नए सबूतों की जानकारी नहीं दी है लेकिन अगर ये साबित हो गया कि बिलाल चरमपंथियों के मददगार हैं तो उन्हें मौत की सज़ा हो सकती है.

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