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बेघर जनसंख्या में 26 फ़ीसदी पूर्व सैनिक | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका में एक रिपोर्ट में कहा गया है कि देश के हर चार बेघर लोगों में से एक सेना का पूर्व सैनिक है और ऐसा तब है जबकि पूर्व सैनिकों की संख्या देश की कुल वयस्क जनसंख्या की मात्र 11 फ़ीसदी है. लोगों के बेघर होने की समस्या को ख़त्म करने के लिए बने राष्ट्रीय गठबंधन का कहना है, "2006 की एक औसत रात को 744,313 बेघर लोगों में से 194,254 लोग पूर्व सैनिक थे." बिना मुनाफ़ा चलने वाली इस संस्था ने इन आँकड़ों को सदमा पहुँचाने वाला और असंगत बताया. पूर्व सैनिकों के बेघर होने की समस्या को ख़त्म करने के महत्वपूर्ण मिशन की इस रिपोर्ट के अनुसार बेघर पूर्व सैनिकों की संख्या देश की कुल बेघर जनसंख्या की 26 फ़ीसदी है. इनमें भी चवालीस हज़ार से 64 हज़ार पूर्व सैनिक पूरी तरह बेघर हैं जबकि पाँच हज़ार पूर्व सैनिक बेघर होने के ख़तरे के साथ जी रहे हैं. यह संख्या डिपार्टमेंट ऑफ़ वेटेरन अफ़ेयर्स एंड सेंसस ब्यूरो के आँकड़ों पर आधारित है. इस संस्था ने पूर्व सैनिकों के लिए रहने के स्थान बनाने की सलाह दी है. संस्था ने सरकार को सैनिक की सेवा समाप्ति के 30 दिनों के अंदर एक जोखिम निर्धारण प्रक्रिया भी तैयार करने को कहा है. गठबंधन के अध्यक्ष नैन रोमन कहते हैं, "यह हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम उन्हें सहारा दें हमारे देश के लिए काम किया. कम से कम उन्हें बेघर होने से बचाने के लिए हम एक घर और कुछ ज़रूरी सहायता तो कर ही सकते हैं." कुछ वकीलों ने भी इराक़ और अफ़ग़ानिस्तान से आए सैनिकों के आश्रयों में रहने पर अपनी चिंता जताई है.
वाशिंगटन में एक पूर्व सिपाही बेन इसराइल ने बीबीसी के विंसेंट डाउड को बताया कि वह अपनी उम्र के तीसरे शतक से ही बेघर हैं. वह इस अमीर देश की सड़कों या आश्रयों में ही रहते हैं और कभी-कभी तो उन्हें अपनी कार में भी सोना पड़ता है. 1973 में अमरीका में अनिवार्य रूप से सैनिकों की भर्ती तो बंद हुई लेकिन बेन इसराइल ने स्वेच्छा से अमरीका की सेना में भर्ती ले ली. तब वह मात्र 17 साल के थे. अमरीका की सेना में भर्ती के बाद उन्होंने सिर्फ़ काम ही किया और बहुत कम पढ़ पाए. 1980 के अंत से लेकर नवंबर 2006 तक वह ज़्यादातर समय बेघर रहे हैं. बेन कहते हैं कि उनके ख़राब समय ने उन्हें बता दिया कि अमरीका का पूर्व सैनिक विभाग अपने संसाधनों का प्रयोग कितने ग़लत तरीके से करता है. उनका कहना है, "यह विभाग सफे़द हाथी हैं क्योंकि यह अपना धन ग़लत जगह इस्तेमाल करता है. अगर यह घर देने पर ज़्यादा ध्यान दें तो बेघर होने की समस्या काफ़ी हद तक सुलझ सकती है." अब बेन की ज़िंदगी काफ़ी बेहतर हो गई है- जितनी उन्होंने सोचा था, उससे भी ज़्यादा लेकिन उनकी भुखमरी इस विभाग ने नहीं बल्कि दानकर्ताओं ने दूर की. | इससे जुड़ी ख़बरें 'साल में सौ सैनिक कर रहे हैं आत्महत्या'04 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस कुछ यूँ गुज़रता है सीमा पर सैनिकों का दिन04 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस घर से बेघर कार में पनाह31 मई, 2006 | पहला पन्ना अमरीकी सेना में 'ख़तरनाक बिखराव'26 जनवरी, 2006 | पहला पन्ना अमरीकी सैनिकों पर दुर्व्यवहार का मामला28 जुलाई, 2005 | पहला पन्ना लापता अमरीकी सैनिकों में से एक मिला03 जुलाई, 2005 | भारत और पड़ोस | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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