BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
बुधवार, 31 मई, 2006 को 14:21 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
घर से बेघर कार में पनाह
कार
अन्या कार को ही अपना घर समझने लगी थीं
नौ महीने रात-दिन कार में गुज़ारने के बाद अन्या पीटर्स को यक़ीन नहीं आ रहा है कि उनका अपना भी एक घर है.

घर से बेघर होने के बाद अन्या ने अपनी कार में पनाह ली. दिन भर वह सड़कों पर घूमतीं, किसी अस्पताल या होटल के बाथरूम में चुपचाप जाकर नहाती-धोतीं और रात को अपनी कार की सीट को ही पलंग समझ कर सो जातीं.

इस दौरान अन्या लायब्रेरी के कंप्यूटर के ज़रिए बाहरी दुनिया की जानकारी रखती रहीं.

 देखा जाए तो मुझे हर तरह का आराम है. वह प्रायवेसी है जिसकी मैं कल्पना ही करती थी. लेकिन यहाँ वह जानीपहचानी महक नहीं है जिसकी मैं आदी हो गई थी. यहाँ कुछ भी अपना नहीं लगता".
अन्या अपने नए घर के बारे में

कंप्यूटर का ही इस्तेमाल उन्होंने किया ब्लॉग लिखने के लिए और यह ब्लॉग न्यूयॉर्क टाइम्स और ली मॉंड के ज़रिए दुनिया भर के पाठकों तक पहुँचे.

बीबीसी पर प्रकाशित

यहाँ तक कि बीबीसी ऑनलाइन ने उनकी कहानी छापी जो दो लाख पाठकों ने पढ़ी.

इन्हीं पाठकों में थी ब्रिटेन की सबसे बड़ी साहित्यिक एजेंसियों में से एक कर्टिस ब्राउन.

एजेंसी ने अन्या का मामला प्रकाशकों तक पहुँचाया और कुछ ही दिन के बाद हार्पर कॉलिंस ने अन्या पीटर्स को अपनी अनोखी ज़िंदगी पर एक किताब लिखने का प्रस्ताव दिया.

उसी दौरान उनके एक ब्लॉग को न्यू स्टेट्समैन पत्रिका ने अपने मीडिया पुरस्कार के लिए नामांकित कर लिया.

किताब लिखने के लिए उन्हें जो राशि मिल रही है वह तो गोपनीय है लेकिन प्रकाशकों का कहना है कि वह इतनी ज़रूर है कि अन्या अपने पैर जमा सकें.

दूसरा मौक़ा

अन्या ने अब किराए का एक मकान ले लिया है.

 मैं दोबारा कभी वैसी ज़िंदगी नहीं जीना चाहूँगी. सारे रिश्तों और लोगों से मेरा संपर्क ही टूट गया था. मुझे यह बेहतरीन मौक़ा मिला है
अन्या अपने जीवन में बदलाव पर

पहली रात वहाँ गुज़ारने के बाद उनका कहना था, "देखा जाए तो मुझे हर तरह का आराम है. वह प्रायवेसी है जिसकी मैं कल्पना ही करती थी. लेकिन यहाँ वह जानीपहचानी महक नहीं है जिसकी मैं आदी हो गई थी. यहाँ कुछ भी अपना नहीं लगता".

लेकिन अन्या ने हालात में इस बदलाव का स्वागत ही किया है. उनका कहना है, "पता नहीं यह सपना है या हक़ीक़त. लेकिन लगता है भाग्य की देवी मुझ पर मेहरबान हो गई है. मेरे चेहरे पर एक मुसकराहट है जिसे मैं रोक नहीं पा रही हूँ".

प्रकाशक हार्पर कॉलिंस इस पुस्तक को लेकर इतने आशावान हैं कि वे विश्वास जता रहे हैं कि यह टॉप टेन में अपनी जगह बनाएगी.

अन्या पीटर्स अपने पुराने अनुभव के बारे में कहती हैं. "मैं दोबारा कभी वैसी ज़िंदगी नहीं जीना चाहूँगी. सारे रिश्तों और लोगों से मेरा संपर्क ही टूट गया था. मुझे यह बेहतरीन मौक़ा मिला है".

इससे जुड़ी ख़बरें
'दुनिया का सबसे मंहगा घर'
07 अगस्त, 2005 | मनोरंजन
इसराइली हमले ने सैकड़ों को बेघर किया
12 अक्तूबर, 2003 को | पहला पन्ना
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>