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बुधवार, 31 अक्तूबर, 2007 को 13:08 GMT तक के समाचार
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दुबई में 159 मज़दूर हिरासत में
मज़दूरों को लेबर कैम्पों में कई बार अमानवीय स्थितियों में रहना पड़ता है
पिछले दिनों संयुक्त अरब अमीरात में दुबई में गिरफ़्तार किए गए चार हज़ार से अधिक आप्रवासी मज़दूरों में से अधिकतर को बुधवार को रिहा कर दिया गया.

ये मज़दूर वेतन बढ़ाने और काम की स्थितियों में सुधार की माँग को लेकर हड़ताल कर रहे थे, बाद में ये हड़ताल उग्र हो गई और हड़ताली मज़दूरों ने तोड़फोड़ की तो उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया था.

इनमें से ज्यादातर लोग भारतीय हैं.

दुबई से स्थानीय पत्रकार अतुल अनेजा ने बताया कि इन हड़ताली कर्मचारियों में से 159 लोगों को रिहा नहीं किया गया है और उनके ख़िलाफ़ आपराधिक आरोप लगाए गए हैं जबकि बाक़ी लोगों को भविष्य में हिंसक गतिविधियों में भाग न लेने का आश्वसान लिखित रूप से देने पर छोड़ दिया गया.

माना जा रहा है कि इन 159 को उनके देश वापस भेज दिया जाने की कार्रवाई शुरू की जाएगी.

ये सभी लोग दुबई की एक कंस्ट्रक्शन कंपनी में काम करते हैं और दुबई से चालीस किलोमीटर दूर जबल अल अली नाम के स्थान पर लेबर कैम्प में रहते हैं.

ये सभी लोग क़ानूनी तौर पर दुबई में नौकरी कर रहे हैं और औसतन 650 दिरहम मासिक वेतन पर काम करते हैं जो लगभग 10 हज़ार रुपए के आसपास है.

दुबई और खाड़ी के अन्य देशों में बहुत बड़ी संख्या में भारतीय मज़दूर काम करते हैं जिनमें ऐसे लोग भी शामिल हैं जो वहाँ क़ानूनन मज़दूर के तौर पर नहीं बल्कि पर्यटक के तौर पर गए थे और नियमों के विरुद्ध काम करने लगे.

जो मज़दूर ग़ैर-क़ानूनी तौर पर काम कर रहे हैं उनकी स्थिति अधिक बुरी है और वे अपनी फ़रियाद लेकर सरकार के पास भी नहीं जा सकते.

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