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दुबई में 159 मज़दूर हिरासत में | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पिछले दिनों संयुक्त अरब अमीरात में दुबई में गिरफ़्तार किए गए चार हज़ार से अधिक आप्रवासी मज़दूरों में से अधिकतर को बुधवार को रिहा कर दिया गया. ये मज़दूर वेतन बढ़ाने और काम की स्थितियों में सुधार की माँग को लेकर हड़ताल कर रहे थे, बाद में ये हड़ताल उग्र हो गई और हड़ताली मज़दूरों ने तोड़फोड़ की तो उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया था. इनमें से ज्यादातर लोग भारतीय हैं. दुबई से स्थानीय पत्रकार अतुल अनेजा ने बताया कि इन हड़ताली कर्मचारियों में से 159 लोगों को रिहा नहीं किया गया है और उनके ख़िलाफ़ आपराधिक आरोप लगाए गए हैं जबकि बाक़ी लोगों को भविष्य में हिंसक गतिविधियों में भाग न लेने का आश्वसान लिखित रूप से देने पर छोड़ दिया गया. माना जा रहा है कि इन 159 को उनके देश वापस भेज दिया जाने की कार्रवाई शुरू की जाएगी. ये सभी लोग दुबई की एक कंस्ट्रक्शन कंपनी में काम करते हैं और दुबई से चालीस किलोमीटर दूर जबल अल अली नाम के स्थान पर लेबर कैम्प में रहते हैं. ये सभी लोग क़ानूनी तौर पर दुबई में नौकरी कर रहे हैं और औसतन 650 दिरहम मासिक वेतन पर काम करते हैं जो लगभग 10 हज़ार रुपए के आसपास है. दुबई और खाड़ी के अन्य देशों में बहुत बड़ी संख्या में भारतीय मज़दूर काम करते हैं जिनमें ऐसे लोग भी शामिल हैं जो वहाँ क़ानूनन मज़दूर के तौर पर नहीं बल्कि पर्यटक के तौर पर गए थे और नियमों के विरुद्ध काम करने लगे. जो मज़दूर ग़ैर-क़ानूनी तौर पर काम कर रहे हैं उनकी स्थिति अधिक बुरी है और वे अपनी फ़रियाद लेकर सरकार के पास भी नहीं जा सकते. | इससे जुड़ी ख़बरें दुबई के मजबूर भारतीय मजदूर10 फ़रवरी, 2005 | पहला पन्ना 'सशस्त्र संघर्ष में बच्चों का शोषण'27 जुलाई, 2005 | पहला पन्ना यूनीसेफ़ ने बाल श्रमिकों पर चिंता जताई21 फ़रवरी, 2005 | पहला पन्ना दुबई में होगी सबसे ऊँची इमारत09 अगस्त, 2005 | पहला पन्ना दुबई में समुद्र के बीच बसेगी नई दुनिया24 सितंबर, 2004 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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