|
यूनीसेफ़ ने बाल श्रमिकों पर चिंता जताई | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र बाल कोष यूनीसेफ़ का कहना है कि दुनियाभर के 21 करोड़ बाल श्रमिकों की व्यापक पैमाने पर मदद की तत्काल आवश्यकता है. यूनीसेफ़ ने अपनी ताज़ा रिपोर्ट में कहा है कि पांच से 15 साल की उम्र के अनेक बच्चों को बंधुआ मज़दूर के रूप में,खानों में और सैनिकों के रूप में काम लिया जाता है. साथ ही वे यौन शोषण का भी शिकार होते हैं. यूनीसेफ़ का कहना है कि बाल मज़दूरी को तभी समाप्त किया जा सकता है जब ग़रीबी ख़त्म हो. उसने धनी देशों से विकास कार्यों के लिए और सहायता की मांग की है. संस्था का कहना है कि 21वीं शताब्दी में बाल श्रमिकों मौजूदगी पूरी दुनिया पर एक बदनुमा दाग है. रिपोर्ट का कहना है कि बच्चों को गुलाम की तरह लगभग 40 रुपए में महीने भर तक काम करवाया जाता है. इन बच्चों से वेश्यावृत्ति करवाई जाती है, उन्हें घरेलू काम करने को मज़बूर किया जाता है और साथ ही उनका इस्तेमाल अपराध करवाने के लिए भी किया जाता है. चिंता अफ़्रीका में बाल श्रमिकों की संख्या सबसे अधिक है जहां चार से 14 साल की उम्र वाले 41 प्रतिशत जबकि एशिया में 21 प्रतिशत और लतीनी अमरीका और कैरिबियाई देशों में 17 प्रतिशत बाल श्रमिकों की संख्या है. रिपोर्ट का कहना है कि एशिया में बाल श्रमिकों की संख्या सर्वाधिक है और यह दुनिया के कुल बाल श्रमिकों का 60 फीसदी है. धनी देशों ने 2015 तक ग़रीबी और भूख समाप्त के लिए वचन दिया हुआ है. यूनीसेफ़ का कहना है कि यदि यह लक्ष्य हासिल भी कर लिया गया तो भी लाखों बच्चों के लिए काफ़ी देर हो चुकी होगी. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||