BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
सोमवार, 21 फ़रवरी, 2005 को 05:21 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
यूनीसेफ़ ने बाल श्रमिकों पर चिंता जताई
बाल श्रमिकों पर चिंता
यूनीसेफ़ बाल श्रमिकों की दशा पर चिंतित
संयुक्त राष्ट्र बाल कोष यूनीसेफ़ का कहना है कि दुनियाभर के 21 करोड़ बाल श्रमिकों की व्यापक पैमाने पर मदद की तत्काल आवश्यकता है.

यूनीसेफ़ ने अपनी ताज़ा रिपोर्ट में कहा है कि पांच से 15 साल की उम्र के अनेक बच्चों को बंधुआ मज़दूर के रूप में,खानों में और सैनिकों के रूप में काम लिया जाता है.

साथ ही वे यौन शोषण का भी शिकार होते हैं.

यूनीसेफ़ का कहना है कि बाल मज़दूरी को तभी समाप्त किया जा सकता है जब ग़रीबी ख़त्म हो.

उसने धनी देशों से विकास कार्यों के लिए और सहायता की मांग की है.

संस्था का कहना है कि 21वीं शताब्दी में बाल श्रमिकों मौजूदगी पूरी दुनिया पर एक बदनुमा दाग है.

रिपोर्ट का कहना है कि बच्चों को गुलाम की तरह लगभग 40 रुपए में महीने भर तक काम करवाया जाता है.

इन बच्चों से वेश्यावृत्ति करवाई जाती है, उन्हें घरेलू काम करने को मज़बूर किया जाता है और साथ ही उनका इस्तेमाल अपराध करवाने के लिए भी किया जाता है.

चिंता

अफ़्रीका में बाल श्रमिकों की संख्या सबसे अधिक है जहां चार से 14 साल की उम्र वाले 41 प्रतिशत
बच्चे काम करते हैं.

जबकि एशिया में 21 प्रतिशत और लतीनी अमरीका और कैरिबियाई देशों में 17 प्रतिशत बाल श्रमिकों की संख्या है.

रिपोर्ट का कहना है कि एशिया में बाल श्रमिकों की संख्या सर्वाधिक है और यह दुनिया के कुल बाल श्रमिकों का 60 फीसदी है.

धनी देशों ने 2015 तक ग़रीबी और भूख समाप्त के लिए वचन दिया हुआ है.

यूनीसेफ़ का कहना है कि यदि यह लक्ष्य हासिल भी कर लिया गया तो भी लाखों बच्चों के लिए काफ़ी देर हो चुकी होगी.

इससे जुड़ी ख़बरें
इंटरनेट लिंक्स
बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>