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'सशस्त्र संघर्ष में बच्चों का शोषण' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सशस्त्र संघर्ष वाले इलाकों में बच्चों की सुरक्षा के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने एक प्रस्ताव पारित किया है. हत्या और शारीरिक शोषण समेत बच्चों के साथ होने वाले दुर्व्यवहार पर नज़र रखने पर भी सुरक्षा परिषद में सहमति बन गई है. बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन करने के आरोप में 50 से ज़्यादा सरकारों और विद्रोही गुटों पर नज़र रखने और उन्हें सज़ा देने पर भी सुरक्षा परिषद में सहमति हुई है. इस साल जारी की गई रिपोर्ट में सुरक्षा परिषद ने उन संगठनों का नाम दिया है जो संघर्ष में बच्चों का इस्तेमाल करती हैं. इनमें श्रीलंका के एलटीटीई समेत सोमालिया, बुरुंडी, सूडान और नेपाल के विद्रोही गुट भी शामिल हैं. सुरक्षा परिषद ने इन संगठनों से कहा है कि वो बच्चों के ख़िलाफ़ होने वाली हिंसा रोक़ने के लिए क़दम उठाएँ. संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिनिधि ओलारा उटूनू ने कहा है कि कई सगंठन चाहते हैं कि इस सूची से उनका नाम हट जाए और वे इस ओर क़ाम करने के लिए तैयार हैं. पर साथ ही सुरक्षा परिषद ने कहा है कि अगर ये सगंठन या सरकारें उचित क़दम नहीं उठाती हैं तो वो कार्रवाई पर विचार करेगा. इनमें आने-जाने पर रोक लगाने समेत वित्तीय और सैनिक मदद पर प्रतिबंध लगाना भी शामिल है. सुरक्षा परिषद के मुताबिक़ पिछले दशक में हुए सशस्त्र संघर्षों में बीस लाख बच्चे मारे गए हैं और आज भी ढाई लाख बच्चे बतौर सैनिक लड़ रहे हैं. |
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