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मंगलवार, 30 अक्तूबर, 2007 को 02:15 GMT तक के समाचार
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इसराइल के फ़ैसले से संयुक्त राष्ट्र असहमत
बिजली गुल
इसराइल ने गज़ा में बिजली कटौती भी शुरु की है
संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने कहा है कि गज़ा पट्टी की पूरी आबादी को सज़ा देने का इसराइल का फ़ैसला स्वीकार नही किया जा सकता.

इसे लेकर इसराइल ने भी चिंता जताई है.

लगातार हो रहे रॉकेट हमलों के जवाब में इसराइल ने गज़ा पट्टी में पेट्रोल और डीज़ल की आपूर्ति कम करना शुरु कर दिया है.

पिछले जून में प्रतिद्वंद्वी फ़लस्तीनी गुट फ़तह पर जीत के बाद से गज़ा पट्टी पर हमास का कब्जा है.

गज़ा में पेट्रोल और डीज़ल की आपूर्ति कम करने के फ़ैसले को इसराइल के अटॉर्नी जनरल की मंज़ूरी मिली हुई है.

लेकिन अटॉर्नी जनरल ने गज़ा पर पड़ रहे मानवीय असर का आकलन किए बिना वहाँ बिजली की आपूर्ति घटाने को मंज़ूरी देने से इनकार कर दिया है.

उल्लेखनीय है कि पेट्रोल और डीज़ल के लिए गज़ा पट्टी पूरी तरह इसराइल पर निर्भर करता है जबकि उसकी आधी बिजली इसराइल से आती है.

इसराइल का कहना है कि गज़ा को ईंधन में 15 प्रतिशत की कटौती हमास पर दबाव बनाने का एक अहिंसक तरीक़ा है.

इसराइल ने कहा है कि मुख्य अस्पतालों के लिए पर्याप्त बिजली आपूर्ति की जाती रहेगी और गज़ा के एकमात्र बिजली घर में ईंघन की आपूर्ति जारी रहेगी.

मानवीय त्रासदी

संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता ने महासचिव का बयान पढ़कर सुनाया है. इसमें उन्होंने फ़लस्तीनी चरमपंथियों के रॉकेट हमलों की निंदा करते हुए इसे तत्काल रोकने को कहा है.

बान की मून
मून ने कहा है कि सामूहिक सज़ा कोई हल नहीं हो सकता

लेकिन उन्होंने कहा है कि वे यह भी मानते हैं कि सज़ा देने के लिए इसराइल ने जो क़दम उठाया है उसका असर पूरे गज़ा के लोगों पर पड़ेगा.

उन्होंने कहा है, "ईंधन में कटौती से गज़ा के 14 लाख लोगों की मानवीय त्रासदी में बढ़ोत्तरी होगी."

बान की मून ने कहा है, "सामूहिक रुप से सज़ा देना कोई हल नहीं हो सकता."

अपने प्रतिबंधों के तहत इसराइल ने बिजली की लाइनों में से एक को 15 मिनट के लिए बंद कर दिया था और यदि इसके बाद भी रॉकेट हमले जारी रहे तो यह कटौती दो घंटो तक बढ़ाए जाने की योजना है.

लेकिन इसराइल के अटॉर्नी जनरल मेनाहम मेज़ाउज़ ने कहा है कि जब तक संभावित मानवीय असर का आकलन नहीं कर लिया जाता तब तक बिजली की कटौती को मंज़ूरी नहीं दी जा सकती.

हालांकि उन्होंने ईंधन में कटौती को मंज़ूरी दे दी है.

इसराइल और फ़लस्तीनी मानवाधिकार समूहों ने इस कटौती के ख़िलाफ़ इसराइली सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाएँ दायर की हैं.

इस बीच गज़ा पर शासन कर रहे हमास गुट और कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने इस कटौती की निंदा की है.

हालांकि गज़ा में बीबीसी के संवाददाता रश्दी अबु अलूफ़ का कहना है कि इसराइल की ईंधन कटौती का असर अभी गज़ा के लोगों पर दिख नहीं रहा है.

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