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गुरुवार, 14 जून, 2007 को 02:08 GMT तक के समाचार
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गज़ा पट्टी पर हमास का नियंत्रण
हमास के लड़ाके
इससे पहले भी कई बार संघर्षविराम की घोषणा की जा चुकी है
प्रतिद्वंद्वी फ़लस्तीनी गुटों फ़तह और हमास के नेताओं ने कई दिनों से चल रही हिंसा के बाद 'संघर्षविराम' पर सहमति का साझा बयान जारी किया है.

लेकिन इसके बावजूद गज़ा में भारी संघर्ष जारी है.

ख़बरें हैं कि गज़ा पर अब हमास का नियंत्रण हो गया है और पश्चिमी तट भी अब संघर्ष के दायरे में आ गया है.

पिछले दिनों हुई हिंसा में 80 से अधिक लोग मारे गए हैं. इनमें से 17 लोगों की मौत तो बुधवार को ही हुई.

संकेत हैं कि फ़तह गुरुवार की शाम तक यह फ़ैसला कर लेगा कि वह साझा सरकार में रहना चाहता है या नहीं.

वैसे फ़तह ने पहले ही धमकी दे दी थी कि यदि हिंसा नहीं रुकी तो वह सरकार से हट सकती है.

फ़तह के नेता, फ़लस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास और हमास नेता, फ़लस्तीनी प्रधानमंत्री इस्माइल हानिया ने एक संयुक्त बयान जारी किया था. इसका प्रसारण फ़लस्तीनी टेलीविज़न पर किया गया था.

एक वरिष्ठ हमास नेता ने बीबीसी को बताया है कि दोनों नेताओं के बीच टेलीफ़ोन पर चर्चा के बाद यह बयान जारी किया गया है.

अधिकारियों का कहना है कि हमास ने नौ शर्तें रखी थीं जिसमें एक यह थी कि फ़लस्तीनी सुरक्षाबलों पर नियंत्रण के लिए एक मंत्री की नियुक्ति की जाए और दूसरा यह कि फ़लस्तीनी सीमा की सुरक्षा में फ़तह के साथ हमास को भी शामिल किया जाए.

उधर फ़तह के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि हालांकि ये शर्तें सिद्धांत रुप से स्वीकार कर ली गई हैं लेकिन दोनो पक्षों के बीच और बातचीत की ज़रूरत है.

लेकिन उल्लेखनीय है कि प्रतिद्वंद्वी गुटों फ़तह और हमास ने मिलकर मार्च में साझा सरकार का गठन इस उम्मीद के साथ किया था कि इससे दोनों के बीच तनाव कम होगा लेकिन ऐसा होता हुआ दिख नहीं रहा है.

हिंसा

गज़ा
गज़ा में पिछले दिनों में हुई यह सबसे बड़ी हिंसा है

उधर संघर्षविराम की घोषणा के बाद भी भीषण हिंसा जारी है.

हमास का दावा है कि उसने फ़तह के बंदूकधारियों को उत्तरी गज़ा से खदेड़ दिया है और अब दक्षिणी गज़ा के भी अधिकांश हिस्सों में उनका नियंत्रण हो गया है.

हिंसा की घटनाओं में सिर्फ़ बुधवार को ही 17 लोगों के मारे जाने की ख़बरें हैं.

शनिवार से चल रही हिंसा में 80 से अधिक लोग मारे गए हैं. हिंसा की शुरुआत शनिवार को ही हुई थी जब दोनों गुटों के बीच गज़ा की सड़कों पर और मकानों की छतों से भारी गोलाबारी हुई थी. दोनों ने एक दूसरे पर रॉकेट से गोले दागे थे और मशीनगनों से गोलियाँ बरसाईं थीं.

हालांकि सोमवार को एक संघर्षविराम हुआ था लेकिन वह तुरंत टूट भी गया था.

बीबीसी संवाददाता कात्या एडलर का कहना है कि इस संघर्ष में हमास जीतता हुआ दिख रहा है क्योंकि गज़ा के ज़्यादातर हिस्सों में उसका नियंत्रण हो गया दिखता है.

शांति-सैनिकों का प्रस्ताव

इस बीच हिंसा पश्चिमी तट पर भी फैल गई है.

बान की मून
मून के प्रस्ताव पर अभी प्रतिक्रिया नहीं मिली है

फ़तह ने कहा है कि यदि हमास गज़ा में हमले नहीं रोकता है तो वे 'ख़ून के बदले ख़ून' की नीति अपनाएँगे.

बीबीसी के संवाददाता टिम फ़्रैंक को फ़तह के चरमपंथियों ने एक शरणार्थी शिविर में ले जाकर हमास के बंधक भी दिखाए.

इस बीच संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने सुझाव दिया है कि गज़ा में अंतरराष्ट्रीय शांति सेना की तैनाती की जा सकती है.

बान की मून का कहना है कि शांति सेना का सुझाव फ़लस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास और इसराइली प्रधानमंत्री एहुद ओल्मर्ट ने दिया है.

बुधवार को संयुक्त राष्ट्र राहत एजेंसी के दो कार्यकर्ता हिंसा में मारे गए हैं और इसके बाद संयुक्त राष्ट्र ने गज़ा में राहतकार्य स्थगित करने का फ़ैसला किया है.

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