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चीन में नए बिशप को मिली मान्यता | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाँच दशकों में पहली बार चीन की राजधानी बीजिंग के एक कैथोलिक पादरी को पोप की स्वीकृति मिलने के बाद बिशप नियुक्त किया गया है. इससे पहले सरकारी नियंत्रण वाला चीनी कैथोलिक चर्च ख़ुद पादरियों की नियुक्ति करता रहा है और इसमें वैटिकन की अनुमति नहीं ली जाती थी. बीजिंग के नए पादरी फ़ादर जोसेफ़ ली शान होंगे जिनके पूर्ववर्ती का इस साल के शुरू में निधन हो गया था. पूर्व पादरी की नियुक्ति 1979 में हुई थी और तब भी वैटिकन से कोई सलाह-मशविरा नहीं किया गया था. इस मामले पर वैटिकन और चीन के बीच तनाव रहा है लेकिन हाल ही में पोप बेनेडिक्ट ने पहल करते हुए चीनी कैथोलिक चर्च को चिट्ठी लिखी थी. इस चिट्ठी में उन्होंने सुलह की पेशकश की थी. इससे तनाव कम करने में मदद मिली. पोप ने अपने पत्र में कहा था कि कूटनीतिक संबंधों की बहाली के लिए वैटिकन बातचीत शुरू करने पर राज़ी है. चीन ने वर्ष 1951 में वैटिकन से संबंध तोड़ लिए थे क्योंकि तब पोप ने ताइवान को अस्तित्व को स्वीकार किया था. चीन में कैथोलिक ईसाइयों की संख्या 80 लाख से एक करोड़ 20 लाख के बीच है. ये सरकारी चर्च और एक भूमिगत चर्च के बीच दो धड़ों में बँटे हुए हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें चीन-वेटिकन तनाव बढ़ने की आशंका14 मई, 2006 | पहला पन्ना अमरीकी चर्च समलैंगिकता पर बँटे17 दिसंबर, 2006 | पहला पन्ना 'समलैंगिक लोग पादरी नहीं बन सकते'29 नवंबर, 2005 | पहला पन्ना समलैंगिकता के सवाल पर चर्चों में फूट25 फ़रवरी, 2005 | पहला पन्ना बलात्कार के दोषी पाए गए पादरी08 फ़रवरी, 2005 | पहला पन्ना इराक़ में अपहृत आर्चबिशप रिहा18 जनवरी, 2005 | पहला पन्ना इराक़ में पादरी का अपहरण17 जनवरी, 2005 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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