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'समलैंगिक लोग पादरी नहीं बन सकते' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
वेटिकन ने अपने नए नीतिगत दस्तावेज़ में कहा है कि समलैंगिकों और समलैंगिक संस्कृति के समर्थकों को रोमन कैथोलिक पादरी बनने की इजाज़त नहीं होगी. वेटिकन ने समलैंगिकता को ऐसा बड़ा पाप बताया है जिसे किसी भी परिस्थिति में सही नहीं ठहराया जा सकता. वेटिकन की नज़र में समलैंगिकता एक प्रवृति है, न कि अवस्थिति. और समलिंगी प्रवृति से छुटकारा पा चुके लोग पादरी बनने की प्रक्रिया में शामिल हो सकते हैं. लेकिन ऐसा कोई व्यक्ति समलैंगिक प्रवृति छोड़ने के तीन साल बाद ही पादरी बन सकेंगा. नये नियमों के अनुसार हर कैथोलिक पादरी को ब्रह्मचर्य की शपथ लेनी होगी. नए पादरियों के लिए वेटिकन का नए दस्तावेज़ में मौजूदा पादरियों का विशेष उल्लेख नहीं किया गया है, यानी ये नियम पादरी बनने के लिए सेमिनरी आने वाले लोगों के लिए दिशा-निर्देश होंगे. यह दस्तावेज़ पूर्व पोप जॉन पॉल द्वितीय के आदेश पर की गई समीक्षा का परिणाम है. अमरीका में पादरियों पर यौन शोषण के आरोप लगाए जाने के कई मामलों के बाद उन्होंने इस बारे में आदेश दिया था. अमरीका में उठे विवादों के चलते रोमन कैथोलिक चर्च को मुआवज़े के रूप में लाखों डॉलर का भुगतान करना पड़ा था. अभी भी वैसे कई मामले लंबित पड़े हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें कैसी है ओपस डी की दुनिया ?19 सितंबर, 2005 | पहला पन्ना धर्म में तोड़-मरोड़ न करें: पोप21 अगस्त, 2005 | पहला पन्ना पोप बेनेडिक्ट की ईसाई एकता की अपील24 अप्रैल, 2005 | पहला पन्ना 'अन्य धर्मों के साथ संबंधों को बढ़ावा देंगे'20 अप्रैल, 2005 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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