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शनिवार, 25 अगस्त, 2007 को 11:20 GMT तक के समाचार
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असंतुलित लिंग अनुपात पर नया क़ानून
बच्चे
चीन के ज़्यादातर स्कूलों में लड़कों के मुकाबले लड़कियाँ कम हैं
चीन सरकार का कहना है कि बड़े पैमाने पर कन्या भ्रूण हत्या के कारण लिंग अनुपात में असंतुलन से निपटने के लिए वो नए क़ानून बना रही है.

वैसे कन्या भ्रूण हत्या पर पहले से ही प्रतिबंध लगा हुआ है लेकिन नए क़ानून के तहत अभिभावकों और डॉक्टरों को सज़ा देने के नए प्रावधान रखे जाएँगे.

चीन की परिवार नियोजन एसोसिएशन ने कहा है कि लड़कियों और लड़कों के अनुपात के बीच बहुत अंतर है- एक शहर में हर पाँच लड़कियों के पीछे आठ लड़के हैं.

विशेषज्ञों का कहना है कि इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं.

कुछ लोगों का कहना है कि लाखों पुरुषों को शादी के लिए महिलाएँ नहीं मिल रहीं और इससे असामाजिक और हिंसक प्रवृत्ति में बढ़ावा हो सकता है.

लड़कों को तरजीह

चीन में सिर्फ़ एक ही संतान की नीति है और पारंपरिक तौर पर लड़के को ही तरजीह दी जाती है. इस कारण माता-पिता आम तौर पर ये सुनिश्चित करने की कोशिश करते हैं कि पैदा होने वाला बच्चा लड़का ही हो.

कुछ लोग बच्चे का लिंग पता करने के लिए ग़ैर-क़ानूनी अल्ट्रासांउड परीक्षण कराते हैं और अगर लड़की हो तो गर्भपात करवा लिया जाता है.

बीजिंग की रेनमिन विश्वविद्यालय में जनसंख्या मामलों के विशेषज्ञ सॉंग जियांग कहते हैं, इसकी जड़ लोगों की पारंपरिक सोच है कि लड़के लड़कियों से बेहतर है, ख़ासकर ग़रीब इलाक़ों में. ये लोग सोचते हैं कि लड़के परिवार में हाथ बटाएँगे.

शुक्रवार को ये बताया गया कि लियानयुँगगैंग शहर में चार वर्ष से कम उम्र के बच्चों में 100 लड़िकयों के मुकाबले 163.5 लड़के हैं.

शिन्हुआ ने रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा है कि 99 शहरों में लिंग अनुपात 125 से ज़्यादा है.

संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक लिंग अनुपात 107 से ज़्यादा नहीं होना चाहिए.

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