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हनीफ़ जेल से रिहा, वीज़ा मामला अधर में | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ब्रिटेन में नाकाम कार बम धमाकों के सिलसिले में गिरफ़्तार भारतीय डॉक्टर हनीफ़ को रिहा कर दिया गया है लेकिन उनके वीज़ा को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है. शुक्रवार को ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों ने मोहम्मद हनीफ़ के ख़िलाफ़ मामला वापस लेने की घोषणा की और यह भी स्वीकार किया कि इस मामले में ग़लती हुई है. लेकिन उनके ऑस्ट्रेलिया में रहने को लेकर सवाल अभी भी क़ायम है. उनके वीज़ा को लेकर अभी विचार विमर्श चल रहा है. उनके चरित्र को लेकर उठे सवाल के बाद उनका वीज़ा रद्द कर दिया गया था. डॉक्टर हनीफ़ के वकीलों का कहना है कि वे अपने मुवक्किल को भारत भेजे जाने की किसी भी कोशिश को चुनौती देंगे. ऑस्ट्रेलियाई लोक अभियोजन विभाग के निदेशक डेमियन बग ने कहा कि हनीफ़ के ख़िलाफ़ पर्याप्त सबूत नहीं हैं. उन्होंने माना कि इस मामले में ग़लती हुई है. डॉक्टर हनीफ़ की पत्नी फ़िरदौस अपने पति की रिहाई से बेहद खुश हैं. बीबीसी से बातचीत में फिरदौस ने कहा, “ मैं बहुत खुश हूँ क्योंकि सच्चाई की जीत हुई है. हमें न्याय मिला है. इसके लिए मैं भारत सरकार और हर भारतीय नागरिक को धन्यवाद देती हूँ जिनके बिना यह मुमकिन नहीं था.” हालाँकि फ़िरदौस की अभी तक अपने पति से बातचीत नहीं हो पाई है और वे अपने चचेरे भाई के ज़रिए डॉक्टर हनीफ़ से बातचीत करने की लगातार कोशिश कर रहीं हैं. यह पूछे जाने पर कि क्या भारत सरकार की ओर से उन्हें कोई सूचना दी गई, फ़िरदौस ने बताया, “विदेश मंत्री के सचिव ने मुझे फ़ोन करके मुबारकबाद दी और कहा कि इससे हमारे पूरे देश की इज़्ज़त हुई है.” मीडिया में आई ख़बरों के बाद उनके परिवार की हुई बदनामी के बारें में फ़िरदौस कहती हैं, “अब सबको मालूम हो गया है कि डॉक्टर हनीफ़ ने कोई ज़ुर्म नहीं किया और वो पूरी तरह से बेगुनाह हैं.” फ़िरदौस का कहना था कि उन्हें नहीं मालूम कि अब आगे क्या कार्रवाई होगी और उनके पति कब तक देश वापस आएंगे. 'अपर्याप्त सबूत' ऑस्ट्रेलिया के आव्रजन मंत्री केविन एंड्रयूज़ ने 'आतंकवाद' के मामले में गिरफ़्तार भारतीय डॉक्टर मोहम्मद हनीफ़ के ख़िलाफ़ दिए गए सबूतों की समीक्षा करने की घोषणा की थी.
इसी के बाद उनके ख़िलाफ़ 'आतंकवाद' से जुड़े मामले वापस लेने की घोषणा की गई है. पिछले महीने ब्रिटेन में हुए नाकाम कार बम धमाकों के सिलसिले में डॉक्टर हनीफ़ को दो जुलाई को उस समय गिरफ़्तार किया गया था जब वे भारत जाने की तैयारी कर रहे थे. उनके मामले को लेकर ऑस्ट्रेलियाई सरकार के रुख़ पर भी सवाल उठे थे. दरअसल ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों ने आरोप पत्र में कहा था कि डॉक्टर हनीफ़ ने एक ‘आतंकवादी संगठन’ का सहयोग किया. डॉक्टर हनीफ़ पर आरोप लगा कि उन्होंने अपना सिम कार्ड अपने एक रिश्तेदार को दिया था, जो कार बम धमाके के सिलसिले में एक अभियुक्त है. वहाँ की एक अदालत ने ‘लापरवाही’ के कारण चरमपंथी संगठन का सहयोग देने का मामला मानते हुए उन्हें ज़मानत दे दी थी. समीक्षा लेकिन ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने ज़मानत मिलने के कुछ ही घंटों बाद उनका वीज़ा रद्द कर उन्हें हिरासत में रखने का फ़ैसला किया था.
पहले ये कहा गया था कि सिम कार्ड उस जलती कार से मिला था, जिससे ग्लासगो हवाई अड्डे की एक इमारत पर टक्कर मारी गई थी. लेकिन उसके बाद ये बात सामने आई कि ये सिम कार्ड लिवरपूल से बरामद हुआ था. इस तथ्य के सामने आने से हनीफ़ के ख़िलाफ़ मामला कमजोर हो गया और उनके ख़िलाफ़ सबूतों की समीक्षा करने का फ़ैसला लिया गया. | इससे जुड़ी ख़बरें ऑस्ट्रेलिया में भारतीय डॉक्टर चिंतित25 जुलाई, 2007 | पहला पन्ना हनीफ़ मामला: सरकार पर सवाल21 जुलाई, 2007 | पहला पन्ना सीबीआई ऑस्ट्रेलिया की मदद करेगी20 जुलाई, 2007 | भारत और पड़ोस हनीफ़ पर भारत ने चिंता जताई16 जुलाई, 2007 | भारत और पड़ोस हनीफ़ को हिरासत में रखे जाने का फ़ैसला16 जुलाई, 2007 | पहला पन्ना हनीफ़ पर आरोप तय, अदालत में पेशी13 जुलाई, 2007 | पहला पन्ना डॉक्टर हनीफ़ की हिरासत की अवधि बढ़ी09 जुलाई, 2007 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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