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ईरान में 'अनुशासन' की गाज
ईरानी छात्र
छात्रों ने प्रोफेसरों को समय से पहले सेवानिवृत्त किए जाने के विरोध में प्रदर्शन किया था
ईरान में छात्रों और प्रोफ़ेसरों का कहना है कि पिछले महीने के दौरान छात्रों के ख़िलाफ़ अनुशासन के मामलों में भारी वृद्धि हुई है.

पिछले दो महीनों में देशभर में 29 छात्र गिरफ़्तार किए गए हैं और केवल 40 दिनों में ही 207 छात्रों की अनुशासन समिति के सामने पेशी हो चुकी है.

जबकि पिछली सरकार में एक महीने में औसतन ऐसे चार मामले ही सामने आते थे. इस ताज़ा मुहिम से प्रभावित होने वालों में सुधरावादी विचारों वाले बेबाक प्रोफ़ेसर मौलवी मोहसिन कादीवर भी है.

शिक्षक प्रशिक्षण विश्वविद्यालय से तबादला कर उन्हें दर्शन शास्त्र और नैतिक शिक्षा के अनुसंधान संस्थान में भेज दिया गया है, जहाँ स्नातक के छात्रों से उनका संपर्क कम ही हो सकेगा.

इससे पहले यूनिवर्सिटी की अनुशासन समिति ने उनके ख़िलाफ़ कई मामले बनाए थे, जिनमें बीबीसी को इंटरव्यू देना भी शामिल था.

कार्रवाई

वे उन प्रोफ़ेसरों में से हैं जिन्हें दो साल पहले राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद के शासन में आने के बाद सेवानिवृत्ति के लिए बाध्य किया गया था या फिर अपनी कुर्सी छोड़ने के लिए कहा गया था.

बीबीसी संवाददाताओं का कहना है कि इस मुहिम का उद्देश्य विश्वविद्यालयों से उदारवादी और धर्मनिरपेक्ष विचारों को ख़त्म करना बताया जा रहा है जिसे अहमदीनेजाद के समर्थक दूसरी धार्मिक क्रांति के नाम पर चला रहे हैं.

प्रोफ़ेसर ही नहीं, सरकार विरोधी विचारों वाले छात्रों को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है.

गत वर्ष दिसंबर में अहमदीनेजाद जब अमीर कबीर विश्वविद्यालय गए थे तो छात्रों ने उन्हे तानाशाह करार देते हुए उनके ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया था. इसके बाद यहाँ के आठ छात्रों को जेल भेज दिया गया था.

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