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रूस की चिंता दूर करने की कोशिश | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने कहा है कि रुस को अमरीका की मिसाइल रक्षा प्रणाली से डरने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि रूस अमरीका का दुश्मन नहीं है. ग़ौरतलब है कि अमरीका की मिसाइल रक्षा प्रणाली का कुछ हिस्सा यूरोप में भी स्थापित किया जा रहा है. बुश ने कहा है कि शीत युद्ध काफ़ी पहले ही समाप्त हो चुका है और अब अमरीका और रूस में कोई दुश्मनी नहीं है. राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने चैक गणराज्य की यात्रा के दौरान यह बयान दिया है. वह जर्मनी में होने वाले जी-8 सम्मेलन में भाग लेने के जाते समय रास्ते में चैक गणराज्य रुके हैं. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने धमकी दी थी कि अगर अमरीका की मिसाइल रक्षा प्रणाली स्थापित की जाती है तो वह अपने हथियारों का रुख़ यूरोप की तरफ़ कर देंगे. उनके इस बयान को शीत युद्ध के दौरान अक्सर होने वाली बयानबाज़ी का एक नमूना माना जा रहा है. अमरीकी प्रशासन ने एक नए शीतयुद्ध के हालात से तो इनकार किया है लेकिन रूस की तरफ़ से इस तरह की भाषा का इस्तेमाल उसी दौर की चिंताओं की याद दिलाता है. सहयोग का आहवान चैक गणराज्य के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के साथ एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में बुश ने कहा कि नई प्रणाली शुद्ध रूप से एक रक्षात्मक उपाय है जिसका निशाना रूस नहीं बल्कि असल ख़तरें हैं.
अमरीका पोलैंड में ऐसे रॉकेट लगाना चाहता है जो जासूसी कर सकें और चैक गणराज्य में एक राडार अड्डा बनाना चाहता है. अमरीका का कहना है कि ये हथियार कुछ संभावित ख़तरा पैदा करने वाले देशों के ख़िलाफ़ हैं जिनमें ईरान और उत्तर कोरिया जैसे देश शामिल हैं. राष्ट्रपति बुश ने कहा कि वह रूस को इस प्रणाली में सहयोग के लिए आमंत्रित करेंगे. बुश बुधवार को जर्मनी में जी-8 सम्मेलन के दौरान संभवतः राष्ट्रपति पुतिन से मुलाक़ात करेंगे. जॉर्ज बुश ने कहा, "रूस हमारा दुश्मन नहीं है. मैं राष्ट्रपति पुतिन के साथ बातचीत करने के लिए उत्सुक हूँ. मेरा संदेश होगा कि रूस को मिसाइल रक्षा प्रणाली से डरने की ज़रूरत नहीं है." बुश ने कहा, "क्यों ना मिसाइल रक्षा प्रणाली में आप भी सहयोग करें. क्यों ना आप भी अमरीका का साथ इस प्रणाली में हाथ बँटाएं. आप अपने सैनिक अधिकारी और वैज्ञानिक भेजें - यह देखने के लिए कि यह प्रणाली किस तरह काम करती है." लेकिन रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लैफ़रोफ़ ने इन विचारों को ख़ारिज कर दिया है कि ईरान या उत्तर कोरिया से अमरीका को कोई ख़तरा है. उन्होंने कहा, "ज़रूरत इस बात की है कि हम वास्तविक ख़तरों का मुक़ाबला करने के लिए एकजुट हों न कि सिर्फ़ काल्पनिक ख़तरों की बात करें. और रूस इस मक़सद में साथ देने के लिए तैयार है." रविवार को राष्ट्रपति पुतिन ने भी कहा था कि अमरीका को ईरान से कोई ख़तरा नहीं है और उन्होंने संकेत दिया था कि अमरीका की इस मिसाइल रक्षा प्रणाली का निशाना रूस है. पुतिन ने कहा था, "अगर यूरोपीय क्षेत्र में अमरीकी हथियार बढ़ते हैं तो हमें यूरोप में नए निशाने साधने होंगे." | इससे जुड़ी ख़बरें नैटो ने रूस के बयान की आलोचना की04 जून, 2007 | पहला पन्ना अमरीका मिसाइल योजना पर नहीं रुकेगा15 मई, 2007 | पहला पन्ना 'घरेलू मामलों में विदेशी धन का दख़ल'26 अप्रैल, 2007 | पहला पन्ना रूस में पुतिन के ख़िलाफ़ प्रदर्शन15 अप्रैल, 2007 | पहला पन्ना रूस, चीन ने अमरीकी प्रस्ताव वीटो किया13 जनवरी, 2007 | पहला पन्ना इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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