|
सेना वापसी संबंधी विधेयक पारित | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी संसद की प्रतिनिधि सभा ( हाउस ऑफ रिप्रेज़ेंटेटिव) ने एक विधेयक पारित कर इराक़ युद्ध के लिए धन मुहैया कराने पर और शर्तें लगा दी हैं. डेमोक्रेट सांसदों के समर्थन से पारित इस विधेयक के तहत कहा गया है कि इराक़ युद्ध के लिए और धन तभी दिया जाए जब सैनिकों को वापस बुलाने की समयसीमा तय हो. इस विधेयक का पारित होना राष्ट्रपति बुश के लिए झटका माना जा रहा है. राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने ऐसे किसी विधेयक को वीटो करने की धमकी दी थी लेकिन इसके बावज़ूद दस वोटों से यह विधेयक पारित हो गया. इसके साथ ही अब कांग्रेस और राष्ट्रपति बुश टकराव की राह पर एक एक कदम और आगे बढ़ा चुके हैं. देर रात हुई ज़बर्दस्त बहस के बाद हाउस ऑफ रिप्रेज़ेंटेटिव ने इराक़ युद्ध के लिए धन देने संबंधी इस विवादास्पद विधेयक को पारित किया जिसमें अधिकतर सांसदों ने पार्टी के रुख के अनुसार वोट किया. विधेयक के तहत इराक़ में युद्ध जारी रखने के लिए सौ अरब डॉलर की दी जाएगी बर्शते अगले साल अक्तूबर से सैनिकों को वापस बुलाने की शुरुआत हो और अगले छह महीनों में सभी सैनिकों को वापस बुला लिया जाए. रिपब्लिकन सांसदों ने विधेयक की आलोचना करते हुए कहा है कि इससे सेना के हाथ बंध जाएंगे और उनकी सफलता के राह में रोड़े पैदा होंगे. उधर डेमोक्रेट सांसदों का तर्क था कि उन्हें युद्ध की यह दिशा बदलने के लिए अमरीकी जनता का समर्थन प्राप्त है. एक डेमोक्रेट सांसद ने इराक़ युद्ध को अमरीका के इतिहास की सबसे बड़ी भूल क़रार दिया. माना जा रहा है कि सीनेट इस विधेयक को आज ही कम मतों के अंतर से पारित कर देगा. हालांकि इसके बावज़ूद विधेयक का भविष्य राष्ट्रपति बुश के हाथों में है जो इसे अपने विशेषाधिकार का प्रयोग करते हुए वीटो कर सकते हैं. अगर राष्ट्रपति इसे वीटो करते हैं तो कांग्रेस के साथ राष्ट्रपति का टकराव और बढ़ सकता है. सैन्य अपील बुधवार को देर रात हुई इस बहस से पहले जनरल पेट्रास ने इराक़ में सैनिक बढ़ाने की राष्ट्रपति की योजना के समर्थन में अपील की थी और सांसदों से बात भी की थी. इससे पहले इराक़ के विदेश मंत्री होश्यार ज़ेबारी ने भी संभावित विधेयक की आलोचना की थी. ईरान दौरे पर गए ज़ेबारी ने बीबीसी से बातचीत मे कहा कि कांग्रेस द्वारा सैनिकों को वापस बुलाने के लिए समयसीमा तय करना सही नहीं है और इससे देश की सुरक्षा और राजनीतिक विकास पर बुरा असर पड़ेगा. | इससे जुड़ी ख़बरें सैनिकों की तैनाती की समयसीमा बढ़ी11 अप्रैल, 2007 | पहला पन्ना चरमपंथियों ने ली ज़िम्मेदारी13 अप्रैल, 2007 | पहला पन्ना 'इराक़ी सुरक्षा के लिए नाज़ुक समय'23 अप्रैल, 2007 | पहला पन्ना हमले में नौ अमरीकी सैनिक मारे गए24 अप्रैल, 2007 | पहला पन्ना इराक़ में हालात बेहद ख़राब:रिपोर्ट25 अप्रैल, 2007 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||