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फ़लूजा में लड़ाई, आठ चरमपंथियों की मौत | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ में सुरक्षाबलों का कहना है कि फ़लूजा में अल क़ायदा चरमपंथियों के साथ भीषण लड़ाई हुई है जिसमें आठ चरमपंथी मारे गए हैं. इराक़ी प्रवक्ता के मुताबिक पाँच पुलिसकर्मी भी इसमें घायल हुए हैं. मंगलवार दोपहर को कई घंटों तक ये संघर्ष चला लेकिन इसके बारे में ख़बरें बुधवार को आनी शुरू हुईं. ये झड़पें ऐसे समय हुई हैं जब इराक़ पर अमरीका के नेतृत्व में हुए हमले के चार साल पूरे हो गए हैं. उधर इराक़ के उपराष्ट्रपति तारिक़ अल हाशमी ने कहा है कि देश में शांति बहाली के लिए चरमपंथियों से भी बात करनी चाहिए. उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि इसके अलावा कोई विकल्प नहीं है कि सबसे बात की जाए सिवाए अल क़ायदा के." इराक़ी उपराष्ट्रपति का कहना था, "अल क़ायदा के अलावा बाक़ी सबको बातचीत के लिए बुलाना चाहिए ताकि वो अपनी बात रख सकें. मुझे नहीं लगता कि अल क़ायदा बातचीत करना चाहत है." बीबीसी से बातचीत में तारिक़ अल हाशमी ने कहा कि चरमपंथी इराक़ी समुदाय का ही हिस्सा हैं. तारिक़ अल हाशमी सुन्नी समुदाय से हैं और पिछले वर्ष शिया चरमपंथियों ने उनकी बहन और दो भाइयों की हत्या कर दी थी. इराक़ में जारी हिंसा के पीछे कई गुट सक्रिय हैं. इस हिंसा में हर महीने सैकड़ों लोगों की मौत हो रही है. इसमें सुन्नी समुदाय के लोग शामिल हैं जो अल क़ायदा के समर्थक हैं. वहीं दूसरी ओर शिया मिलिशिया भी है जो सुन्नी नागरिकों पर हमले करते हैं. सुन्नी समुदाय के राजनेताओं का कहना है कि इराक़ी के सुरक्षाबलों में शिया मिलिशिया का दखल है. | इससे जुड़ी ख़बरें सद्दाम के सहयोगी रमादान को फाँसी20 मार्च, 2007 | पहला पन्ना 'इराक़ी शरणार्थियों की अनदेखी'20 मार्च, 2007 | पहला पन्ना अमरीकी सेना पर विश्वास नहीं19 मार्च, 2007 | पहला पन्ना बुश ने इराक़ पर धैर्य रखने की सलाह दी19 मार्च, 2007 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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