|
ताहा यासीन की फाँसी की सज़ा बरक़रार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ में अपील अदालत ने पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन के भाई और पूर्व उपराष्ट्रपति ताहा यासीन रमज़ान की मौत की सज़ा बरक़रार रखी है. ताहा यासीन रमज़ान को मानवता के ख़िलाफ़ अपराधों के आरोप में फ़रवरी 2007 में मौत की सज़ा सुनाई गई थी. उन्होंने इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील दायर की थी जिसे अपील अदालत ने ख़ारिज कर दिया. मानवाधिकार संगठनों ने अदालत से अनुरोध किया कि ताहा यासीन रमज़ान की मौत की सज़ा को बदल जाना चाहिए क्योंकि मौत की सज़ा क लिए पर्याप्त सबूत मौजूद नहीं हैं. नवंबर 2006 में विशेष ट्राइब्यूनल ने ताहा यासीन रमज़ान की मौत की सज़ा को कम करके उम्रक़ैद में तब्दील कर दिया था लेकिन अपील अदालत ने कहा कि उम्रक़ैद की सज़ा पर्याप्त नहीं होगी. सद्दाम हुसैन और उनकी सरकार के सदस्यों पर मुक़दमा चलाए जाने की प्रक्रिया, सुनाए गए फ़ैसले और फाँसी देने के तरीके विवादों के घेरे में रही है. सद्दाम हुसैन को फाँसी दिए जाने के समय उन पर जातीय टिप्पणियाँ भी की गईं. जबकि ख़ुफ़िया सेवाओं के पूर्व प्रमुख बरज़ान अल तिकरिती को फाँसी देने के समय तालमेल की कमी से उनका सिर धड़ से अलग हो गया था. अमरीका के पूर्व अटॉर्नी जनरल रम्ज़े क्लार्क इन मुक़दमों की सुनवाई के दौरान मौजूद रहे थे और उन्होंने मुक़दमों की कार्यवाही को 'भद्दा मज़ाक' बताया था. सद्दाम हुसैन के वकीलों की टीम ने भी आरोप लगाया था कि सरकार मुक़दमों की सुनवाई में दख़लअंदाज़ी कर रही थी और अमरीकी संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच ने भी इन आरोपों को बताया था. क्रूरता के आरोप दुजैल में 1982 में लगभग 148 लोगों को मारने में भूमिका होने के आरोप में ताहा यासीन रमज़ान पर भी सद्दाम हुसैन के साथ ही मुक़दमा चलाया गया था.
कहा जाता है कि सद्दाम हुसैन ने 1982 में दुजैल गाँव का दौरा किया था और उसी समय उनकी हत्या की कोशिश की गई थी और आरोपों के अनुसार सद्दाम हुसैन की हत्या की नाकाम कोशिश के बाद ही दुजैल में 148 लोगों को मारा गया था. ताहा यासीन रमज़ान के बारे में कहा जाता है कि वह सद्दाम हुसैन के आदेशों को काफ़ी क्रूरता से लागू कराते थे. ऐसे भी आरोप हैं कि कुवैत पर इराक़ के हमले के बाद हुए खाड़ी युद्ध के दौरान इराक़ के दक्षिणी हिस्से में उठी बग़ावत को दबाने की कोशिशों के दौरान शिया मुसलमानों को मारने में भी ताहा यासीन रमज़ान ने मुख्य भूमिका निभाई थी. इसके अलावा यह भी कहा जाता है कि इराक़-ईरान युद्ध के दौरान 1980 के दशक में ताहा यासीन रमज़ान ने पब्लिक आर्मी मिलिशिया बनाई थी जिसमें आम लोगों को भर्ती करके उन्हें मामूली सा प्रशिक्षण देकर लड़ाई के मोर्चे पर भेजा जाता था. ताहा यासीन रमज़ान बाथ पार्टी के उन गिने-चुने नेताओं में से एक हैं जो 1968 में हुई बग़ावत में शामिल थे. उसी बग़ावत के ज़रिए बाथ पार्टी सत्ता में आई थी. ताहा यासीन मोहम्मद को जब उद्योग मंत्री बनाया गया था तो उनके एक बयान के बारे में काफ़ी चर्चा होती है जिसमें उन्होंने कहा था, "मैं उद्योग के बारे में तो कुछ नहीं जानता, मगर इतना ज़रूर जानता हूँ कि जो भी कोई कठिन परिश्रम नहीं करेगा, उसे मौत के घाट उतार दिया जाएगा." दुजैल हत्याकाँड मामले की सुनवाई कर रही अदालत में उन्होंने हाल ही में कहा था, "अल्लाह जानता है कि मैंने कुछ भी ग़लत नहीं किया, जो भी मुझे सताएगा, उसका बदला अल्लाह ही लेगा." अपील अदालत से उनकी अपील ख़ारिज होने के बाद अब ताहा यासीम रमज़ान को 30 दिन के भीतर फाँसी दे दी जाएगी. | इससे जुड़ी ख़बरें इराक़ के पूर्व उप राष्ट्रपति को फाँसी होगी12 फ़रवरी, 2007 | पहला पन्ना बुश ने फाँसी के तरीके पर आपत्ति जताई17 जनवरी, 2007 | पहला पन्ना 'पिछले साल 34 हज़ार इराक़ी मारे गए'16 जनवरी, 2007 | पहला पन्ना फाँसी दिए जाने की व्यापक निंदा16 जनवरी, 2007 | पहला पन्ना फाँसी की जाँच की माँग उठी15 जनवरी, 2007 | पहला पन्ना तिकरिती की फाँसी को लेकर विवाद15 जनवरी, 2007 | पहला पन्ना सद्दाम की एक और वीडियो क्लिप09 जनवरी, 2007 | पहला पन्ना संयुक्त राष्ट्र ने फाँसी रोकने की अपील की07 जनवरी, 2007 | पहला पन्ना इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||