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ईरान पर प्रतिबंध सख़्त होने की संभावना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सुरक्षा परिषद के पाँचों स्थायी सदस्य देश और जर्मनी ईरान के ख़िलाफ़ और सख़्त प्रतिबंध लगाने पर सोमवार को लंदन में चर्चा करेंगे. यह फ़ैसला संयुक्त राष्ट्र की परमाणु एजेंसी आईएईए की उस ताज़ा रिपोर्ट के बाद लिया गया जिसमें कहा गया है कि ईरान ने यूरेनियम संवर्धन रोकने के बारे में दी गई संयुक्त राष्ट्र की समय को नज़रअंदाज़ कर दिया है. यह रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के अध्यक्ष मोहम्मद अल बारादेई ने तैयार की है जिसमें कहा गया है कि ईरान न सिर्फ़ यूरेनियम संवर्धन रोकने में नाकाम रहा है, बल्कि इसका विस्तार कर रहा है. एजेंसी ने ताज़ा रिपोर्ट सिर्फ़ छह पन्नों की तैयार की है जिसमें कहा गया है कि ईरान की अतीत में की गई परमाणु गतिविधियों के बारे में उठे सवालों के जवाब देने के बारे में मामूली प्रगति हुई है जबकि ईरान सरकार से सहयोग का अनुरोध किया गया था. रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान ने यूरेनियम संवर्धन का कार्यक्रम शोध और अनुसंधान के स्तर से बढ़ाकर औद्योगिक पैमाने पर पहुँचा दिया है. रिपोर्ट कहती है कि ईरान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की शर्तों को नकारते हुए भारी पानी का एक रिएक्टर और भारी पानी तैयार करने वाला एक संयंत्र भी बना रहा है. संयुक्त राष्ट्र ने ईरान को यूरेनियम संवर्धन रोकने के लिए बुधवार यानी 21 फ़रवरी 2007 तक का समय दिया था जिसका पालन नहीं करने पर ईरान के ख़िलाफ़ प्रतिबंध और बढ़ाए जा सकते हैं. दबाव अमरीका ने इस समय सीमा का पालन नहीं करने के बारे में कहा है कि "ईरान सरकार और ईरानी लोगों ने एक मौक़ा गँवा दिया है."
अमरीकी विदेश उपमंत्री निकोलस बर्न्स ने कहा है कि कूटनीति से बात नहीं बनी तो, ईरान पर और दबाव डालना ही एकमात्र विकल्प रह जाएगा. बर्न्स ने कहा, "हमें पता है कि धैर्य रखने की ज़रूरत है, कूटनीति को मौक़ा दिया जाना है. हम ऐसा करने को तैयार भी हैं क्योंकि किसी और उपाय से समस्या का समाधान करने से बेहतर है बातचीत के ज़रिए मतभेदों को दूर करना." "लेकिन ईरान ने ब्रिटेन, अमरीका, रूस, चीन, फ़्रांस और जर्मनी के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया तो मैं समझता हूँ उसे और कड़े प्रतिबंधों के लिए तैयार रहना चाहिए."
उधर ईरान अब भी बातचीत जारी रखे जाने के पक्ष में है. ईरानी विदेश मंत्री मनोचहर मोत्तकी ने कहा, "हम ईरान संबंधी दस्तावेज़ को सुरक्षा परिषद में ले जाने का शुरू से ही विरोध करते रहे हैं, क्योंकि ये एक राजनीतिक क़दम और अवैध है. हम इस मामले पर सुरक्षा परिषद में बहस कराए जाने का विरोध करते हैं." "हम समस्या के बातचीत के ज़रिए समाधान के पक्ष में हैं और समझते हैं कि गतिरोध बातचीत के ज़रिए ही दूर किया जा सकता है." इस बीच ब्रितानी प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने इन अटकलों को ग़लत बताया है कि अमरीका ईरान पर हमला करने की किसी योजना पर काम कर रहा है. वाशिंगटन में बीबीसी संवाददाता जोनाथन बीयल का कहना है कि अमरीका के वरिष्ठ राजनयिक सुरक्षा परिषद के अन्य सदस्यों के साथ संपर्क में हैं और ईरान पर दबाव बढ़ाने के तरीकों के बारे में विचार किया जा रहा है. लेकिन समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने ईरान के परमाणु विभाग के एक अधिकारी मोहम्मद सईदी के हवाले से ख़बर दी है कि यूरेनियम संवर्धन स्थगित करने की माँग का कोई क़ानूनी अधिकार नहीं है और यह अंतरराष्ट्रीय संधियों के ख़िलाफ़ है. ग़ौरतलब है कि संवर्धित यूरेनियम परमाणु रिएक्टरों में ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है लेकिन अगर यूरेनियम का बड़े पैमाने पर और उच्च स्तर पर संवर्धन किया जाए तो इसका इस्तेमाल परमाणु बम बनाने में भी किया जा सकता है. ईरान पश्चिमी देशों के इन दावों का खंडन करता है कि वह परमाणु कार्यक्रम के ज़रिए हथियार बनाने की कोशिश कर रहा है. ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और उससे ऊर्जा ज़रूरतें पूरी की जाएंगी. | इससे जुड़ी ख़बरें 'ईरान परमाणु लक्ष्य हासिल करेगा'21 फ़रवरी, 2007 | पहला पन्ना परमाणु संवर्द्धन पर पीछे नहीं हटेंगे: ईरान 23 अप्रैल, 2006 | पहला पन्ना ईरान पर पाबंदी को लेकर सहमति नहीं19 अप्रैल, 2006 | पहला पन्ना अमरीका की ईरान को कड़ी चेतावनी14 अप्रैल, 2006 | पहला पन्ना परमाणु कार्यक्रम पर पीछे नहीं हटेंगे: ईरान 13 अप्रैल, 2006 | पहला पन्ना ईरान के परमाणु कार्यक्रम की आलोचना12 अप्रैल, 2006 | पहला पन्ना रूस ने भी ईरान पर दबाव बनाया12 अप्रैल, 2006 | पहला पन्ना इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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