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शुक्रवार, 16 फ़रवरी, 2007 को 13:38 GMT तक के समाचार
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सीआईए के अपहरण काँड में मुक़दमा
ओसामा मुस्तफ़ा हसन
हसन का कहना है कि उन्हें मिस्र में चार साल तक प्रताड़ित किया गया
इटली में एक जज ने वर्ष 2003 में मिस्र मूल के एक इमाम ओसामा मुस्तफ़ा हसन के कथित अपहरण के मामले में 26 अमरीकी नागरिकों पर मुक़दमा चलाने का आदेश दिया है जिनमें ज़्यादातर अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए के एजेंट हैं.

ऐसे आरोप हैं कि ओसामा मुस्तफ़ा हसन का सीआईए एजेंटों ने वर्ष 2003 में कथित रूप से अपहरण कर लिया था और उन्हें मिस्र ले जाया गया था जहाँ पर मुस्तफ़ा के अनुसार उन्हें प्रताड़ित किया गया था.

इटली के जज ने कहा है कि इस मामले में पाँच इतावली नागरिक भी शामिल थे जिनमें इटली के सेना की ख़ुफ़िया सेवा के पूर्व प्रमुख निकोलो पोल्लरी भी शामिल हैं.

सीआईए पर आरोप है कि उसने हाल के वर्षों में आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने के संदिग्ध लोगों को ऐसे देशों में लेजाकर पूछताछ की जहाँ आरोपों के अनुसार संदिग्ध लोगों को प्रताड़ित किया गया.

इटली के जज ने जिन 26 अमरीकी नागरिकों पर मुक़दमा चलाने का आदेश दिया है उनमें से ज़्यादातर इटली छोड़कर अब अमरीका में बस चुके हैं. इटली सरकार को अभी इस बारे में फ़ैसला करना होगा कि क्या वह इन अभियुक्तों के प्रत्यार्पण के लिए अमरीका सरकार से अनुरोध करेगी.

इन 26 लोगों में इतालवी शहर मिलान में सीआईए के प्रमुख रॉबर्ट सेल्डोन लेडी भी हैं जिनका कहना है कि उन्होंने इमाम ओसामा मुस्तफ़ा हसन का अपहरण करने के प्रस्ताव का विरोध किया था लेकिन उसे नज़रअंदाज़ कर दिया गया.

रॉबर्ट भी अब इटली से वापस आकर अमरीका में बस चुके हैं. कहा जाता है कि रॉबर्ट ने अपनी ज़िंदगी भर की कमाई लगाकर इटली में एक शानदार घर ख़रीदा था लेकिन उन्हें वह छोड़ना पड़ा.

इटली की ख़ुफ़िया सेवा सीस्मी के पूर्व अध्यक्ष निकोलो पोल्लरी के ख़िलाफ़ पहले से ही संसदीय जाँच हो चुकी है जिसके बाद उन्हें नौकरी से हटाया जा चुका है.

वकीलों का कहना है कि उन्होंने इटली के मौजूदा और भूतपूर्व ख़ुफ़िया एजेंटों से बातचीत और जानकारी के आधार पर हज़ारों दस्तावेज़ तैयार किए हैं और इनमें से कुछ एजेंटों का कहना है कि वे अपहरण की अमरीकी योजना में शामिल रहे थे.

यह मुक़दमा आगामी आठ जून को शुरू होना है.

प्रताड़ना के आरोप

ओसामा मुस्तफ़ा हसन को मिस्र में गत रविवार को रिहा किया गया. उनका कहना है कि काहिरा में उन्हें चार साल बंदी बनाकर रखा गया और इस दौरान उन्हें प्रताड़ित किया गया.

प्रताड़ना की एक घटना का ज़िक्र करते हुए उनका कहना है कि उन्हें एक गीली चटाई पर लेटने के लिए कहा गया और उसमें से बिजली का करंट छोड़ा गया.

मुस्तफ़ा हसन के वकील का कहना है कि वह इस मुक़दमे के दौरान अपनी गवाही देने के लिए मिलान जाने के इच्छुक हैं.

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