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सीआईए 'अपहरण' में अधिकारी गिरफ़्तार
जर्मनी में सीआईए का सैन्य हवाई अड्डा
इटली में सन 2003 में आतंकवादी गतिविधियों के संदेह में एक मुस्लिम मौलवी के अपहरण के मामले में इटली के एक वरिष्ठ ख़ुफ़िया अधिकारी को गिरफ़्तार किया गया है.

इस तरह का आरोप है कि अमरीकी ख़ुफ़िया जाँच एजेंसी सीआईए ने फ़रवरी 2003 में मिलान स्ट्रीट से ओसामा मुस्तफ़ा हसन उर्फ़ अबू उमर नामक मौलकी को अगवा कर लिया था.

ख़ुफ़िया अधिकारी मार्को मैन्सिनी इस मामले की जाँच में गिरफ़्तार किए जाने वाले पहले इतालवी अधिकारी हैं. वह सिस्मी ख़ुफ़िया एजेंसी से संबंद्ध हैं.

अभियोजन पक्ष का कहना है कि मिस्र मूल के मौलवी अबू उमर को जाँच और पूछताछ के लिए मिस्र भेजा गया था जहाँ उन्हें प्रताड़ित किया गया.

इटली की पूर्ववर्ती सरकार ने इस मामले की जानकारी या इसमें किसी तरह का हाथ होने से इनकार किया था.

उधर ओसामा मुस्तफ़ा हसन उर्फ़ अबू उमर का कहना है कि उन्हें उस अमरीकी नीति के तहत पूछताछ के लिए मिस्र ले जाया गया था जिसे "पूछताछ के लिए चोरी-छुपे और अवैध रूप से प्रत्यर्पण" की नीति के रूप में जाना जाता है.

मार्को मैन्सिनी उस समय इटली के सैना की जासूसी निरोधक शाखा के मुखिया थे और यह ओहदा इटली की ख़ुफ़िया सेवा में काफ़ी ऊँचा माना जाता है.

मार्को इराक़ में बंधक बनाए गए इतालवी नागरिकों को छुड़ाने के लिए हुई बातचीत में भी हिस्सा ले चुके हैं.

इटली की एपकॉम समाचार एजेंसी और न्यायिक सूत्रों ने कहा है कि मार्को को बुधवार को गिरफ़्तार किया गया.

रेंडीशन के तहत गिरफ़्तारी
आरोप हैं कि सीआईए ने अनेक लोगों का ग़ैरक़ानूनी तरीके से प्रत्यर्पण किया

मार्को की गिरफ़्तारी की पुष्टि इटली के पूर्व राष्ट्रपति फ्रेंसेस्को कोसीगा ने भी की है.

मिलान नें मजिस्ट्रेट ने सीआईए के ऐसे 22 ख़ुफ़िया एजेंटों के नाम वारंट जारी कर रखे हैं जिन पर फ़रवरी 2003 में हसन के 'अपरहण' मामले में शामिल होने का संदेह है लेकिन अमरीकी अधिकारियों ने इटली के न्याय मंत्रालय के साथ इस मामले में सहयोग करने से इनकार कर दिया है.

अमरीका सरकार ने यह माना है कि उसने आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने के संदिग्ध लोगों को विभिन्न देशों के बीच प्रत्यार्पित किया है लेकिन उसने उन्हें ऐसे देशों को सौंपने के आरोपों का खंडन किया है जो देश प्रताड़ना का सहारा लेते हैं.

प्रत्यर्पण या 'रेंडीशन'

प्रत्यर्पण के लिए आमतौर पर अंग्रेज़ी में EXTRADITION शब्द का इस्तेमाल होता है. अमरीकी विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस ने RENDITION शब्द का इस्तेमाल किया है.

रेंडीशन का भी मतलब होता है कि यदि किसी व्यक्ति ने एक देश में अपराध किया है तो उसे दूसरे देश में भेजा जा सकता है जिससे उसपर वहाँ क़ानूनी कार्रवाई हो सके.

प्रत्यर्पण या EXTRADITION एक तरह का रेंडीशन ही है और वो क़ानून के दायरे में है लेकिन जो अमरीका ने किया है उसे EXTRAORDINARY RENDITION का नाम दिया जा रहा है क्योंकि ये क़ानून के दायरे से बाहर है.

इसके तहत किसी एक देश से अन्य देश में भेजे गए लोगों को अदालत में पेश नहीं किया जाता और सीधी भाषा में बात करें तो ये ग़ैरक़ानूनी है.

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