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बग़दाद में ईरानी दूत का 'अपहरण' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ईरान ने कहा है कि उसके एक दूत जलाल शराफ़ी का कुछ बंदूकधारियों ने इराक़ की राजधानी बग़दाद में अपहरण कर लिया है. ईरानी अधिकारियों ने कहा है कि बग़दाद में ईरानी दूतावास में द्वितीय सचिव जलाल शराफ़ी का गत रविवार को उनकी कार से अपहरण कर लिया गया और यह अपहरण इराक़ी सेना की वर्दी पहने कुछ बंदूकधारियों ने केंद्रीय कर्रादा ज़िले से किया. ईरान ने अपने दूत जलाल शराफ़ी के अपहरण की निंदा की है और शराफ़ी की ज़िंदगी के लिए अमरीका को ज़िम्मेदार ठहराया है. उधर एक अमरीकी सैन्य प्रवक्ता ने कहा है कि जलाल शराफ़ी के अपहरण में कोई अमरीकी या इराक़ी सैनिक शामिल नहीं है. ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मोहम्मद अली हुसैनी ने समाचार एजेंसी इसना से कहा है कि जलाल शराफ़ी का अपहरण एक ऐसे गुट ने किया है जिसका संबंध इराक़ी रक्षा मंत्रालय से है और जो "अमरीकी सेनाओं की निगरानी में काम करता है." प्रवक्ता ने कहा, "ईरान इस्लामी गणराज्य अपने दूत के जीवन और सुरक्षा के लिए इराक़ में मौजूद अमरीकी सेनाओं को ज़िम्मेदार ठहराता है." इससे पहले इराक़ी अधिकारयों ने कहा था कि जलाल शराफ़ी का कथित अपहरण करने वाले लोग इराक़ की 36वां कमांडो बटालियन की वर्दी पहने हुए थे. यह बटालियन एक विशेष सैन्य यूनिट है जो अमरीकी दिशा-निर्देशों पर काम करती है. राजधानी बग़दाद में अमरीकी सैन्य प्रवक्ता लैफ़्टिनेंट कर्नल क्रिस्टोफ़र गार्वर ने ईरानी दूत के कथित अपहरण की ख़बर की पुष्टि नहीं की है. हालाँकि उन्होंने कहा था, "हमने अपनी बटालियनों से जानकारी हासिल की है और इस घटना में उस बटालियन का कोई हाथ नहीं है." अपहरण 'सामान्य' एक इराक़ी अधिकारी ने समाचार एजेंसी एपी को बताया कि जलाल शराफ़ी के अपहरण के समय कुछ गोलियाँ भी चलीं और कथित अपहर्ताओं का पीछा भी किया गया लेकिन जिस कार में शराफ़ी को बिठाया गया था वह भाग गई.
इस मामले में कुछ लोगों को गिरफ़्तार किया गया लेकिन न्यूयॉर्क टाइम्स ने इराक़ी अधिकारियों के हवाले से ख़बर दी है कि उन लोगों के पास इराक़ी रक्षा मंत्रालय के वैध पहचान पत्र हैं. एक अधिकारी ने न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया कि ऐसा भी हो सकता है कि इन लोगों को बर्ख़ास्त कर दिया गया हो और उनके पास ये पहचान पत्र अब भी हों. राजदानी बग़दाद में बीबीसी संवाददाता माइक वुलरिज का कहना है कि अपहर्ता कोई वर्दी पहने हुए थे, इस तथ्य के कई मायने हो सकते हैं. संवाददाता का कहना है कि इराक़ में अक्सर ऐसे लोग अपहरण करते हैं जो किसी तरह की सरकारी वर्दी पहने हुए होते हैं और ये अपहरण कई मामलों में राजनीतिक होने के बजाय, आपराधिक होते होते हैं. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि अमरीका और ईरान के बीच चल रहे तनाव के माहौल में इस तरह की घटनाएँ कूटनीतिक तनाव का एक और कारण बन जाती हैं. तनाव ईरानी दूत के इस कथित अपहरण की ख़बर ऐसे माहौल में आई है जब इराक़ में ईरान की कथित गतिविधियों के मुद्दे पर अमरीका और ईरान के बीच तनाव बना हुआ है. दिसंबर 2006 के आख़िरी दिनों में अमरीकी सैनिकों ने इराक़ में ईरानी वाणिज्य दूतावास के कई कर्मचारियों को पकड़ लिया था जिसके ईरान ने अमरीका से औपचारिक विरोध दर्ज कराया था. अमरीका ने जलाल शराफ़ी के कथित अपहरण के मामले में अपना कोई हाथ होने से इनकार किया है लेकिन अमरीका इराक़ में चरमपंथी गतिविधियों में ईरान के कथित सहयोग को लेकर चिंता ज़रूर ज़ाहिर करता रहा है. संवाददाताओं का कहना है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम मुद्दे पर जो मतभेद हैं, उसी की वजह से इराक़ में मौजूदा तनाव भी बढ़ रहा है. | इससे जुड़ी ख़बरें इराक़ में विस्फोट, 50 से अधिक मौतें02 फ़रवरी, 2007 | पहला पन्ना इराक़ में भीषण विस्फोट, 130 की मौत03 फ़रवरी, 2007 | पहला पन्ना ब्रिटेन की सीरिया को चेतावनी04 जनवरी, 2006 | पहला पन्ना बुश ने सीरिया पर लगाए आरोप19 जुलाई, 2006 | पहला पन्ना तालाबानी पड़ोसियों का सहयोग चाहते हैं17 अक्तूबर, 2006 | पहला पन्ना 'दूतावास को उड़ाने की कोशिश विफल'12 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना 'इराक़ पर सीरिया सहयोग दे सकता है'18 अक्तूबर, 2006 | पहला पन्ना 'अमरीका अन्य देशों को दोष देना बंद करे'02 नवंबर, 2006 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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