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बुधवार, 31 जनवरी, 2007 को 18:43 GMT तक के समाचार
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ज़रा उनकी जुराबें तो देखिए...
पॉल वोल्फ़ोवित्ज़
वोल्फ़ोवित्ज़ ने जूते उतारने के बाद अपने जुराबों की ओर देखा
विश्व बैक के अध्यक्ष पॉल वुल्फ़ोवित्ज़ दुनिया भर से ग़रीबी मिटाने में इस क़दर जुटे हुए लगते हैं कि शायद उन्हें अपनी ज़ुराबों की भी सुध नहीं रही है.

या शायद उन्हें इसके लिए वक़्त ही नहीं मिल पा रहा है.

और यह राज़ तब खुला जब उन्होंने तुर्की में एक मस्जिद में जाने के लिए अपने जूते उतारे.

वे उस समय पश्चिमी तुर्की में थे. दो दिन के दौरे में उन्हें प्रधानमंत्री तैयप आर्दोगान से भी मिलना था.

इसके अलावा वे इस्तांबुल में बेघर लोगों से मिलने गए जिनकी सहायता के लिए विश्वबैंक की एक परियोजना चल रही है.

जब उन्होंने जूते उतारे तो लोगों ने देखा कि उनकी दोनों ज़ुराबों में छेद है और दोनों पैरों के अंगूठे बाहर झाँक रहे थे.

वैसे विश्वबैंक की 2006 की वार्षिक रिपोर्ट बताती है कि उसके अध्यक्ष वुल्फ़ोवित्ज़ की तनख़्वाह पहली जुलाई 2005 को तीन लाख 91 हज़ार 440 डॉलर थी यानी दो लाख पाउंड से अधिक.

रुपए में देखें तो उनकी तनख़्वाह एक करोड़ सत्तर लाख से अधिक ही बैठती है.

इससे पहले भी मीडिया वुल्फ़ोवित्ज़ का मज़ाक उड़ा चुका है.

माइकल मूर की चर्चित डाक्यूमेंट्री फ़िल्म फ़ारेनहाइट 9/11 में दिखाया गया था कि एक टेलीविज़न कार्यक्रम में जाने से पहले वुल्फ़ोवित्ज़ ने अपना कंघा निकाला और उस पर थूकने के बाद उससे अपने बाल सँवारे.

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