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'यूरोपीय देशों को गुप्त जेलों का पता था' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
यूरोपीय संसद की ड्राफ़्ट रिपोर्ट के मुताबिक कई यूरोपीय देशों को ये मालूम था कि सीआईए संदिग्ध चरमपंथियों को ले जाने के लिए उनकी सरजमीं का इस्तेमाल कर रहा है. रिपोर्ट जारी होने से पहले इटली के क्लॉडियो फावा की अगुआई में गठित विशेष समिति यानी एमईपी ने इस मामले की महीनों तक जाँच पड़ताल की. क्लॉडियो फावा ने न्यूज एजेंसी एएफपी से कहा, "कई देशों ने सीआईए को परोक्ष या प्रत्यक्ष रुप से सहयोग दिया." उन्होंने आरोप लगाया कि ईयू की विदेश नीति के प्रमुख हाविया सोलाना ने जाँच के दौरान एमईपी को पूरा ब्यौरा उपलब्ध नहीं कराया. इस वर्ष जून में यूरोप की मानवाधिकार संस्था 'काउंसिल ऑफ यूरोप' ने कहा था कि सीआईए यूरोप के कई जगहों पर गुप्त जेलें चला रहा है जहाँ संदिग्ध चरमपंथियों को रखा जाता है. रिपोर्ट रिपोर्ट में कहा गया है कि कई यूरोपीय देश सीआईए की गुप्त जेलों के बारे में जानते थे. फावा का कहना है कि रोमानिया और पोलैंड ने पूरे मामले की जाँच में सहयोग करने से मना कर दिया. रिपोर्ट में कहा गया है कि बंदियों को लेकर सीआईए कॉ | इससे जुड़ी ख़बरें गुप्त जेल कार्यक्रम पर बुश की आलोचना07 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना 'यूरोपीय देशों ने रिपोर्ट को ख़ारिज किया'07 जून, 2006 | पहला पन्ना काउंसिल ऑफ़ यूरोप की रिपोर्ट का खंडन07 जून, 2006 | पहला पन्ना सीआईए प्रमुख पद पर हेडन नामांकित08 मई, 2006 | पहला पन्ना पॉर्टर गॉस का परिचय05 मई, 2006 | पहला पन्ना ख़बर देने वाला कर्मचारी बर्खास्त 21 अप्रैल, 2006 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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