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शनिवार, 18 नवंबर, 2006 को 04:38 GMT तक के समाचार
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'बयान का ग़लत मतलब निकाला गया'
ब्लेयर
ब्रितानी प्रधानमंत्री कार्यालय का कहना है कि उनके विचारों का ग़लत अर्थ लगाया गया
ब्रितानी प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर के कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि इराक़ में हिंसा के बारे में प्रधानमंत्री के बयान का ग़लत मतलब निकाला जा रहा है.

एक टेलीविज़न इंटरव्यू में जब प्रधानमंत्री ब्लेयर से यह पूछा गया कि क्या अमरीका की अगुआई में इराक़ पर हुआ हमला एक त्रासदी रहा है, ब्लेयर ने हाँ में जवाब दिया था.

लेकिन अब प्रधानमंत्री कार्यालय की प्रवक्ता ने कहा कि प्रधानमंत्री सिर्फ़ सवाल को स्वीकार कर रहे थे. टोनी ब्लेयर ने इराक़ की स्थिति के लिए वहाँ सक्रिय अल क़ायदा के साथ-साथ सुन्नी और ईरान समर्थित शिया चरमपंथियों को ज़िम्मेदार ठहराया.

प्रधानमंत्री ब्लेयर ने यह बात अल जज़ीरा टीवी के लिए जाने-माने टीवी प्रेज़ेंटर डेविड फ्रॉस्ट को दिए एक इंटरव्यू में कहीं.

विपक्षी लिबरल डेमोक्रेट ने उनके इस बयान पर टिप्पणी कर कहा है कि आख़िरकार उन्होंने इराक़ के फ़ैसले की गलती को स्वीकार कर लिया है.

 इराक़ में इसलिए मुश्किलें हैं क्योंकि एक सुनियोजित रणनीति थी जिसमें अल क़ायदा और सुन्नी विद्रोही एक ओर थे. दूसरी ओर ईरान समर्थित शिया चरमपंथी थे
टोनी ब्लेयर, ब्रितानी प्रधानमंत्री

टोनी ब्लेयर का कहना था कि 2003 में इराक़ में अमरीका और ब्रिटेन की योजनाएँ विफल रही हैं.

उन्होंने इराक़ की हिंसा के लिए अल क़ायदा समर्थित सुन्नी चरमपंथियों और ईरान समर्थित शिया चरमपंथियों को दोषी ठहराया.

सर डेविड ने टोनी ब्लेयर से सवाल किया कि इराक़ में पश्चिमी देशों का हस्तक्षेप अब तक त्रासदी साबित हुआ है, तो उनका जवाब था,'' हाँ, लेकिन आप देखें कि मैं लोगों से क्यों कहता हूँ कि इराक़ में मुश्किलें हैं.''

उनका कहना था,'' यह इसलिए मुश्किल नहीं है कि कुछ दुर्घटना की योजना थी. यह इसलिए मुश्किल है क्योंकि एक सुनियोजित रणनीति थी जिसमें अल क़ायदा और सुन्नी विद्रोही एक ओर थे. दूसरी ओर ईरान समर्थित शिया चरमपंथी थे.''

प्रधानमंत्री ब्लेयर का कहना था,'' ऐसे हालात पैदा किए गए जिसमें बहुमत की शांति की इच्छा का स्थान अल्पसंख्यकों की संघर्ष की इच्छा ने ले लिया.''

लेकिन ब्रितानी प्रधानमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि ब्रिटेन इराक़ से अपना हाथ नहीं खींचेगा.

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