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गुरुवार, 26 अक्तूबर, 2006 को 08:13 GMT तक के समाचार
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ऑस्ट्रेलियाई मौलवी ने माफ़ी माँगी
शेख हिलाली
शेख हिलाली का जन्म मिस्र में हुआ था
एक ऑस्ट्रेलियाई मौलवी ने अपने उस बयान के लिए माफ़ी माँगी है जिसमें उन्होंने कहा था कि हिजाब न पहनने वाली महिलाएँ 'बिना ढके' मीट की तरह हैं और वे आकर्षण का केंद्र बनती हैं और उन पर हमले हो सकते हैं.

ऑस्ट्रेलिया के सबसे वरिष्ठ मौलवी शेख ताज-उल दीन अल-हिलाली के इस बयान को लेकर विवाद खड़ा हो गया था.

अब उन्होंने कहा है कि वे सिर्फ़ महिलाओं की इज़्ज़त बचाना चाहते थे और बयान को ठीक से पेश नहीं किया गया.

शेख ताज-उल दीन अल-हिलाली ने कहा था कि जो महीलाएँ हिजाब नहीं पहनती वो 'बिना ढके मीट' ( अनकवर्ड मीट) की तरह हैं.

एक ऑस्ट्रेलियाई अख़बार में उनका बयान छपा था. शेख हिलाली ने बयान सिडनी शहर में लोगों को संबोधित करते हुए दिया था.

मुस्लिम समुदाय की कई महिलाओं ने इस टिप्पणी की आलोचना की है.

ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री जॉन हॉवर्ड ने भी इस बयान निंदा की थी. उनका कहना था कि ये विचार कि बलात्कार के लिए महिलाएँ ही ज़िम्मेदार हैं बिल्कुल निरर्थक है.

खंडन

शेख हिलाली के एक प्रवक्ता ने कहा है कि उनके बयान को संदर्भ से अलग कर छापा गया है और उन्होंने विवाहोत्तर यौन संबंधों की बात की थी.

 अगर वो अपने कमरे में हो, अपने घर में, अपने हिजाब में हो... तो कभी कोई समस्या नहीं होती."
शेख हिलाली

प्रवक्ता ने कहा कि ये बयान ऐसे पुरुषों और महिलाओं के ख़िलाफ़ था जो शादी के बाहर यौन संबंध बनाते हैं और इसमें भड़काउ कपड़ों का सहारा लेते हैं.

शेख हिलाली के आलोचक उन पर पहले 'आत्मघाती हमलों की तारीफ़' करने का आरोप लगा चुके हैं.

आलोचकों ने उन पर ये आरोप भी लगाया था कि शेख हिलाली ने दावा किया था कि 11 सिंतबर को अमरीका पर हुआ हमला 'दमनकारियों पर ख़ुदा की करामात' थी.

विवाद

शेख हिलाली ने अपने ताज़ा बयान में कहा था, "अगर आप बिना ढके हुए मीट को बाहर रख दें और बिल्लियाँ आकर उसे खा लें.....तो इसमें किसकी ग़लती है- बल्लियों की या बिना ढके मीट की."

उनका कहना था कि समस्या बिना ढके मीट की है.

इसके बाद शेख हिलाली ने कहा, "अगर वो अपने कमरे में हो, अपने घर में, अपने हिजाब में.... तो कभी कोई समस्या नहीं होती."

उन्होंने ऐसी महिलाओं की निंदा की जो मेकअप लगाती हैं और इशारा किया कि इससे लोग आकर्षित होते हैं और महिलाओं पर हमले हो सकते हैं.

बाद में शेख हिलाली ने कहा, "इसके बाद एक जज आता है जो आपको 65 साल की सज़ा दे देता है."

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इन बयानों को काफ़ी असंवेदनशील माना जा रहा है क्योंकि सिडनी में छह साल पहले कुछ लेबनानी मूल के ऑस्ट्रेलियाई लोग सामूहिक बलात्कारों में शामिल थे और बाद में उन्हें जेल की सज़ा हो गई थी.

ऑस्ट्रेलिया के वित्त मंत्री ने मुस्लिमों से आग्रह किया था कि वो इस बयान की निंदा करें.

ऑस्ट्रेलिया की सेक्स डिस्क्रिमिनेशन कमिश्नर प्रू गोवार्ड का कहना है कि ये बयान अपराध को बढ़ावा दा सकता है.

उन्होंने कहा कि युवा मुस्लिम पुरुष जो बलात्कार करते हैं वो अदालत में इस बयान का हवाला दे सकते हैं.

प्रू गोवार्ड ने शेख हिलाली को निर्वासित किए जाने की माँग की है.

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