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प्रतिबंध से जुड़े कुछ सवाल | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
फ्रांस में सरकारी स्कूलों में पगड़ी और हिजाब जैसे धार्मिक चिन्हों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. इस प्रतिबंध को लेकर शुरू से ही विवाद चलता रहा है. कुछ सवालों के जवाब. अब इस मुद्दे पर फ़ैसला किसने किया? मामला विवादास्पद रहा है, फ्रांस के राष्ट्रपति शिराक ने फैसला किया वे इस क़ानून को लागू करवाने की राजनीतिक इच्छाशक्ति रखते हैं. इस प्रस्ताव को क़ानून बनने से पहले पूरी प्रक्रिया से गुज़रना पड़ा, इसे संसद की मंज़ूरी हासिल है. फ्रांस में इस मुद्दे पर कैसी प्रतिक्रिया रही? फ्रांस यूरोप का वो देश है जहाँ मुस्लिम समुदाय के सबसे ज़्यादा लोग है. राष्ट्रपति शिराक ने कहा था कि हिजाब एक तरह से मुस्लिम महिलाओं को नीचा दिखाता है फ्रांस के उसूलों के ख़िलाफ़ जाता है. वहीं कुछ लोग कहते है कि मुसलमानों को अपनी धार्मिक पहचान बनाए रखने का अधिकार है. फ्रांस के सिखों और यहूदियों ने इस कानून का विरोध किया था. लेकिन जनमत सर्वेक्षणों के मुताबिक़ फ्रांस की आम जनता के एक बड़े हिस्से ने इस क़ानून का समर्थन किया था. लेकिन क्या इस तरह की बहस यूरोप के किसी और देश में भी चल रही है? फ्रांस ही अकेला देश नहीं है. तीन महीने पहले ही जर्मनी की एक अदालत ने एक टीचर को स्कूल से निकाल दिया था क्योंकि उन्होंने हिजाब उतारने से इनकार कर दिया था. जर्मनी के कुछ राज्य अब स्कूलों में हिजाब पहनने पर पाबंदी लगाने के बारे में विचार कर रहे है. वहीं रूस में मुस्लिम महिलाओं ने क़ानूनी लड़ाई जीत ली थी जब अदालत ने उन्हें पासपोर्ट पर लगाए जाने वाले फ़ोटो के लिए हिजाब पहनने की मंज़ूरी दे दी थी. तुर्की में पहले से ही ऐसा क़ानून लागू है जिसके तहत धार्मिक चिन्हों पर पाबंदी है. अरब देशों और मुस्लिम बहुल देशों में क्या कहना है? कुछ अरब देशों में भी इसको लेकर बहस चल रही है. कुछ उदारवादी और नारीवादी हिजाब के ख़िलाफ़ हैं. वहीं तुर्की में ज़्यादातर महिलाएँ मुस्लिम है और वे हिजाब पहनती है मगर सरकारी संस्थाओं में उनके हिजाब पहनने पर पाबंदी है. तुर्की के अधिकारी तुर्की को एक धर्मनिरपेक्ष देश बनाना चाहते है. |
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