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स्वतंत्रता, समानता और हिजाब
फ्रांस के राष्ट्रपति ज़्याक शिराक़ को स्कूलों में धार्मिक प्रतीकों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध के सवाल को लेकर विरोध का सामना करना पड़ रहा है. वहीं कुछ फ्रांसीसी लोग उनके इस फ़ैसले का समर्थन कर रहे हैं, ये ऐसे लोग हैं जिनका मानना है कि फ्रांस में रहने वालों को किसी धर्म का अनुयायी होने से पहले फ्रांसीसी होना चाहिए. ख़ास तौर पर कुछ फ्रांसीसी लोग मुस्लिम लड़कियों और औरतों के हिजाब पहनने से ख़ासे ख़फ़ा हैं. लेकिन सरकार की इस मंशा के ख़िलाफ़ सैकड़ों लोगों ने रविवार को राजधानी पेरिस में विरोध प्रदर्शन भी किया है. प्रदर्शनकारियों में ज़्यादातर युवा महिलाएँ थीं जिनके सर हिजाब से ढके थे. वैसे लोग यह भी जानते हैं कि शिराक़ का प्रस्ताव दरअसल मुस्लिम लड़कियों के 'हिजाब' पहनने पर प्रतिबंध लगाने के लिए ही है. 'हिजाब' का इस्तेमाल मुसलमान लड़कियाँ अपना सिर ढकने के लिए करतीं हैं. फ्रांस के आम लोगों में इस मुद्दे को लेकर बहुत ही मिलीजुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिली. तरह तरह की मान्यताएं और उनसे जुड़ीं कहानियाँ. पेरिस पहुंचने के बाद मैं अपने एक मित्र के साथ एक कैफ़े में बैठी हुई थी. मौसम बहुत अच्छा था सो हमने बाहर बैठ कर ही नज़ारों का मज़ा लेने का फ़ैसला किया. हमने देखा कि दो मर्द अपने कसरती बदन का प्रदर्शन करते हुए एक दूसरे के हाथ में हाथ डाले वहीं से गुज़र रहे थे. बीच-बीच में वे एक दूसरे को चूम भी रहे थे. मेरे दोस्त ने कहा, "कितनी शर्मनाक बात है!" मैने पूछा, '"क्या, ये दोनों आदमी हैं?' इस पर मेरे दोस्त का कहना था, "नहीं, नहीं, ये नहीं, उनके पीछे जो दो औरतें हैं, मैं उनकी बात कर रहा हूँ." मैंने उन औरतों की तरफ़ देखा, मुझे कुछ भी अजीब नहीं लगा. मैंने फिर अपने दोस्त की तरफ़ मुड़कर उत्सुक नज़रों से देखा. मेरा प्रश्नवाचक सा बना चेहरा देख उसने कहा, "अरे मैं उनके सिर पर रखे उस कपड़े की बात कर रहा हूँ, हिजाब की." ग़ैर-फ़्रांसीसी ये नज़रिया सिर्फ़ मेरे दोस्त का ही नहीं था बल्कि मुझे वहाँ इस तरह के विचारों के कई लोग मिले. उनका मानना है कि मुसलमान परिवार की लड़कियों पर उनके माता-पिता और स्थानीय इमाम हिजाब पहनने के लिए दबाव डालते हैं.
ऐसे सभी लोग फ्रांस में धार्मिक प्रतीक स्कूलों में पहनने पर प्रतिबंध के मामले में लाए गए प्रस्ताव से बेहद ख़ुश हैं. उनका मानना है कि हिजाब पहनने वाली लड़कियाँ और औरतें ग़ैर फ़्रांसीसी दिखतीं हैं. मानवाधिकार दूसरी तरफ़ एक बड़ा समुदाय फ्रांस सरकार के इस प्रस्ताव को मानवाधिकार के हनन के रूप में देखता है. बहुत सी लड़कियों का मानना है कि हिजाब पहनने से उनकी गरिमा बनी रहती है. स्वाधीनता, समानता और भाईचारे वाले फ्रांस जैसे देश में किसी भी संस्कृति को इस तरह से नकारा नहीं जा सकता. मुझे पता चला कि फ्रांस में बाहर से आकर बसे लोगों में सबसे बड़ा समुदाय मुसलमानों का ही है. वहाँ बहुसंस्कृतिवाद भले न हो लेकिन फ्रांस कई धर्मों को मानने वालों का घर बन गया है जब पूरी दुनिया में लोकतंत्र की बहाली के लिए बड़े-बड़े आंदोलन चल रहे हैं, ऐसे में इस तरह की घटनाओं से कितनी उथल-पुथल होगी यह तो वक़्त ही बताएगा. |
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