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रविवार, 22 अक्तूबर, 2006 को 16:58 GMT तक के समाचार
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'बुरक़े पर बहस को लेकर चेतावनी'
ब्रिटेन में बुरक़े को लेकर बहस चल रही है
ब्रिटेन में जातीय समानता आयोग के प्रमुख ट्रेवर फिलिप्स का कहना है कि देश में बुरक़े को लेकर चल रही बहस जातीय दंगे का रूप ले सकती है.

संडे टाइम्स से बातचीत में ट्रेवर फिलिप्स ने कहा, "ऐसा लग रहा है कि सारा मुद्दा ग़लत दिशा में जा रहा है." उन्होंने चेतावनी दी कि ये परिस्थितियाँ उस ओर जा रही हैं, जिसके कारण पाँच साल पहले उत्तरी इंग्लैंड में दंगे भड़क उठे थे.

लेबर पार्टी के सांसद शाहिद मलिक का कहना है कि यह मुद्दा 'विनाशकारी' होता जा रहा है और इससे दक्षिणपंथी पार्टियों को लाभ मिलेगा.

पिछले दिनों पूर्व विदेश मंत्री और हाउस ऑफ़ कामंस के नेता जैक स्ट्रॉ ने यह कहकर नई बहस छेड़ दी थी कि वे नहीं चाहते कि महिलाएँ बुरक़ा पहनें क्योंकि इससे समुदायों के बीच संबंध कठिन हो जाते हैं.

हाल ही में मीडिया में दो रिपोर्टों की ख़ूब चर्चा हुई. इनमें से एक रिपोर्ट थी क्रॉस पहनने वाली ब्रिटिश एयरवेज़ की एक ईसाई कर्मचारी की, जबकि दूसरी रिपोर्ट थी बुरक़ा पहनने वाली एक मुस्लिम सहायक शिक्षिका की.

ख़तरा

जातीय समानता आयोग के प्रमुख ट्रेवर फिलिप्स ने कहा है कि जाति और धर्म पर केंद्रित बहस से बर्नली और ओल्डहैम दंगों की पुनरावृत्ति होने का ख़तरा पैदा हो गया है.

 हमें ऐसी बातचीत की आवश्यकता है लेकिन इसके लिए कुछ क़ायदे हैं. हमें इस तरह किसी को निशाना नहीं बनाना चाहिए और ना ही किसी को तंग करना चाहिए
ट्रेवर फिलिप्स

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, "इस समय ये संघर्ष और ख़तरनाक हो सकता है. हमें संयम बनाए रखना चाहिए."

बीबीसी के साथ बातचीत में ट्रेवर फिलिप्स ने कहा कि मुस्लिम महिलाओं के बुरक़े पहनने को लेकर बहस सम्मानित रूप में शुरू हुई थी लेकिन अब स्थितियाँ बिगड़ रही हैं.

उन्होंने कहा, "हमें ऐसी बातचीत की आवश्यकता है लेकिन इसके लिए कुछ क़ायदे हैं. हमें इस तरह किसी को निशाना नहीं बनाना चाहिए और ना ही किसी को तंग करना चाहिए."

अधूरी बहस

लेबर सांसद शाहिद मलिक का कहना है कि पिछले कुछ दिनों के दौरान इसे लेकर होने वाली बहस अधूरी और बिना पूरी सूचना के थी.

जैक स्ट्रॉ के बयान के बाद शुरू हुई थी बहस

उन्होंने कहा, "इस बहस से धुर दक्षिणपंथियों जैसे- ब्रिटिश नेशनल पार्टी और अल ग़ुराबा, अल मुहाजिरान जैसे संगठनों को लाभ मिलेगा. क्योंकि इसके प्रभाव विनाशकारी हैं."

उन्होंने कहा कि ये शक्तियाँ समाज को बाँटना चाहती हैं ताकि इनका फ़ायदा उठाकर अफ़रा-तफ़री फैलाई जा सके. शाहिद मलिक ने कहा कि इन्हें ऐसा नहीं करने देना चाहिए.

इस बीच इस्लामिक मानवाधिकार आयोग के मसूद शादजारे ने बीबीसी से बातचीत में कहा है कि एक मंत्री के बाद दूसरा मंत्री और फिर कोई मंत्री मुस्लिम समुदाय पर हल्ला बोल रहा है.

उन्होंने कहा कि यह अन्यायपूर्ण है और ना ही ये सम्मानित तरीक़े से बातचीत का माध्यम है.

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