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संयुक्त राष्ट्र दूत को सूडान छोड़ने का आदेश | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सूडान की सरकार ने संयुक्त राष्ट्र के दूत यान प्रोंक को आदेश दिया है कि वो बुधवार की दोपहर तक देश छोड़कर चले जाएँ. बताया जा रहा है कि यान प्रोंक ने अपनी निजी वेबसाइट पर लिखा था कि सूडान की सेना को दारफुर में हार का सामना करना पड़ रहा है और उनका मनोबल भी गिरा है. जान की इसी टिप्पणी के बाद उनके निष्कासन का आदेश जारी किया गया है. इस बाबत सूडान के विदेश मंत्रालय के एक मंत्री ने यान प्रोंक पर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने संवेदनशील विषयों पर कई बार टिप्पणी करके संयुक्त राष्ट्र और सूडान के बीच हुए समझौते का उल्लंघन किया है. विदेश मंत्री ने बताया कि जान को इस आदेश के बारे में अवगत कराते हुए रविवार दोपहर को कह दिया गया है कि वो अगले 72 घंटों में देश छोड़कर चले जाएँ. आरोप सूडान के विदेश राज्यमंत्री अली कार्ती ने बीबीसी को बताया संयुक्त राष्ट्र के दूत ने कई संवेदनशील मुद्दों पर टिप्पणी करके संयुक्त राष्ट्र और सूडान के बीच हुए समझौते का उल्लंघन किया है क्योंकि इन मुद्दों का संबंध उत्तरी और दक्षिणी सूडान के बीच हुए व्यापक शांति समझौते से है. उन्होंने बीबीसी को बताया, "कुछ अवसर पर प्रोंक ने ऐसे मामलों में भी हस्तक्षेप किया है जिनका उनसे कोई संबंध नहीं था. इसके अलावा उन्होंने वो कुछ ऐसे स्थानों पर भी गए जो कि उनके मिशन का हिस्सा नहीं थे." पिछले सप्ताह सूडान की सेना ने प्रोंक पर यह आरोप लगाया था कि वो सेना के ख़िलाफ़ जा रहे हैं और इसके लिए उन्हें देश से निकाल देने की बात कही थी. यान प्रोंक सूडान में संयुक्त राष्ट्र के सबसे बड़े अधिकारी हैं. ग़ौरतलब है कि सूडान अंतरराष्ट्रीय समुदाय के इस दबाव का लगातार विरोध करता रहा है कि दारफुर में संघर्ष को ख़त्म करने का काम संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों को सौंप दिया जाए. यान प्रोंक सोमवार को न्यूयॉर्क के लिए रवाना हो रहे हैं जहाँ उनकी संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफी अन्नान से बातचीत होगी. | इससे जुड़ी ख़बरें 'दारफ़ुर में सामूहिक हत्याओं के सबूत'15 जून, 2006 | पहला पन्ना 'दारफ़ुर विद्रोही समझौते के लिए राज़ी'05 मई, 2006 | पहला पन्ना सूडान ने भी ओसामा से दूरी बनाई24 अप्रैल, 2006 | पहला पन्ना चाड में संघर्ष में कई लोगों की मौत13 अप्रैल, 2006 | पहला पन्ना क्या है चाड की हिंसक समस्या?13 अप्रैल, 2006 | पहला पन्ना दारफ़ुर पर अन्नान के प्रस्ताव का समर्थन14 जनवरी, 2006 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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