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मसौदे में सैन्य कार्रवाई का प्रावधान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी राजनयिक उत्तर कोरिया के परमाणु परीक्षण के मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र में प्रतिबंधों से संबंधित प्रस्ताव का नया मसौदा जारी कर रहे हैं. अमरीका चाहता है कि ये प्रस्ताव इस हफ़्ते के अंत तक पारित हो जाए लेकिन इसके लिए उसे सुरक्षा परिषद के दो अहम सदस्यों - रूस और चीन अब तक चीन और रूस का रवैया यही रहा है कि वे नहीं चाहते कि प्रतिबंधों के उल्लंघन की परिस्थिति में सैन्य कार्रवाई का प्रावधान हो. नए मसौदे की भाषा कुछ नरम है लेकिन उसमें भी प्रतिबंध लागू न होने की परिस्थिति में सैनिक कार्रवाई का प्रावधान है. उसमें उत्तर कोरिया में आने और वहाँ से बाहर जाने वाले सभी सामान के निरीक्षण का प्रावधान भी है. अमरीका ने प्रतिबंधों के प्रस्ताव का पिछला मसौदा जारी करते समय उसे संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सातवें अध्याय के अंतर्गत लाने की बात कही थी. इसका मतलब ये है कि प्रतिबंधों को लागू करना अनिवार्य होगा और अंतत: इन्हें सैन्य कार्रवाई से लागू करवाया जा सकेगा. बुश का कड़ा रवैया इससे पहले अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने ज़ोर देकर कहा था कि उत्तर कोरिया को गंभीर परिणामों को सामना करना ही चाहिए. उनका ये भी कहना था कि अमरीका, रूस, चीन और जापान सहमत हैं कि संयुक्त राष्ट्र उत्तर कोरिया का परमाणु कार्यक्रम बंद करवाए और उसे परमाणु तकनीक का निर्यात करने से रोके. बुधवार को जापान ने एकतरफ़ा फ़ैसले में उत्तर कोरिया के ख़िलाफ़ अनेक | इससे जुड़ी ख़बरें सुरक्षा परिषद ने उत्तर कोरिया को चेताया06 अक्तूबर, 2006 | पहला पन्ना मकसद घातक चेतावनी देना नहीं था: अमरीका05 अक्तूबर, 2006 | पहला पन्ना 'उत्तर कोरिया हथियार चुने या भविष्य'05 अक्तूबर, 2006 | पहला पन्ना अमरीका की उत्तर कोरिया को चेतावनी03 अक्तूबर, 2006 | पहला पन्ना उत्तर कोरिया के ख़िलाफ़ जापानी प्रतिबंध19 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना उत्तर कोरिया की बाहर रहने की धमकी28 जुलाई, 2006 | पहला पन्ना संयुक्त राष्ट्र ने कोरिया पर लगाया प्रतिबंध16 जुलाई, 2006 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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