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पोप ने खुद मुसलमानों से माफी माँगी | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पोप बेनेडिक्ट ने पहली बार खुद पहल करते हुए बवेरिया में पिछले हफ़्ते दिए अपने बयान के लिए माफ़ी माँगी है. उनके बयान की मुस्लिम जगत में तीव्र आलोचना हुई थी. पोप ने कहा कि उनके भाषण में इस्लाम और पैगंबर मोहम्मद से संबंधित टिप्पणी पर पूरी दुनिया में मुस्लिम समुदाय ने जो उग्र प्रतिक्रिया जताई है उसके लिए उन्हें दुख है. भाषण के विवादास्पद अंश से अपने को अलग करते हुए पोप ने कहा कि ये उनके निजी विचार कतई नहीं थे. ईसाईयों के सर्वोच्च धर्मगुरु ने कहा कि उन्होंने 600 साल पुरानी रचना को उद्धृत किया था जिसमें इस्लाम की आलोचना की गई है. पोप ने कहा कि मुसलमानों के साथ गंभीर और सम्मानजनक बातचीत शुरु करने की मंशा से उन्होंने यह बयान दिया था. उन्होंने स्पष्टीकरण देते हुए कहा, "मुझे उम्मीद है कि इससे मेरे बयान का सही अर्थ समझने में मदद मिलेगी जो परस्पर सम्मान की बिना पर गंभीर और खुले बातचीत का निमंत्रण है." प्रतिक्रिया कई मुस्लिम संगठनों ने पोप के इस बयान पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है. जर्मनी में सेंट्रल काउंसिल ऑफ़ मुस्लिम्स ने कहा है कि ये विवाद को शांत करने की दिशा में पोप ने अहम क़दम उठाया है. वहीं मिस्र के विपक्षी दल मुस्लिम ब्रदरहुड ने भी पोप के बयान का स्वागत करते हुए कहा है कि उन्होंने अपने पहले बयान से क़दम पीछे हटाएँ हैं. लेकिन उसने यह भी चेतावनी दी है कि पोप का बयान 'स्पष्ट माफ़ी' नहीं है. मुस्लिम ब्रदरहुड का कहना है कि हो सकता है कि इस बयान से सारे मुसलमान संतुष्ट ना हों. उधर तुर्की के विदेश मंत्री अब्दुल्ला गुल ने उम्मीद जताई कि नवंबर में होने वाली पोप की तुर्की यात्रा तय कार्यक्रम के अनुसार होगी. पोप के बयान पर मुस्लिम देशों में कड़ी प्रतिक्रिया हुई थी. शनिवार को वेटिकन सिटी की ओर से जारी बयान में भी पोप ने इस पर खेद जताया था कि उनके कुछ वाक्यों से इस्लाम में विश्वास रखने वाले लोगों को ठेस पहुँची है. लेकिन रविवार को प्रार्थना के लिए इकट्ठा हुए लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने अपने बयान पर खेद जताया. हालाँकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने जो कुछ कहा था वो उनके अपने विचार नहीं थे. रोम में प्रार्थना सभा के दौरान पोप बेनेडिक्ट ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अब वो लोग संतुष्ट हो गए होंगे, जिन्हें ठेस पहुँची थी. विवाद इस मामले पर विवाद उस समय शुरू हुआ जब पिछले मंगलवार को जर्मनी के एक विश्वविद्यालय में दिए अपने भाषण में पोप ने 14वीं शताब्दी के एक ईसाई राजा की बातों का हवाला दिया. इसमें इस राजा ने पैगम्बर मोहम्मद के बारे में टिप्पणी की थी कि मोहम्मद पैगम्बर के संदेश ने दुनिया को केवल 'दुष्टता और अमानवीयता' दी. पुलिस ने रविवार की प्रार्थना सभा में पोप की मौजूदगी को लेकर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की थी. पिछले मंगलवार को पोप की टिप्पणी के बाद मोरक्को ने वेटिकन स्थित अपने राजदूत को वापस बुला लिया था और टिप्पणी को 'अपमानजनक' कहा था. मुस्लिम ब्रदरहुड ने पोप से ख़ुद उपस्थित होकर अपनी टिप्पणी पर माफ़ी मांगने को कहा था. रविवार को प्रार्थना सभा के पहले पोप ने कहा कि वे इस बात को लेकर अफ़सोस व्यक्त करते हैं कि उनके शब्दों पर ऐसी प्रतिक्रिया हुई. बाद में प्रार्थना सभा में पोप ने कहा, "वो टिप्पणी एक राजा की कही हुई बातें थी. वो मेरी व्यक्तिगत राय नहीं थी. मुझे उम्मीद है कि अब लोगों को मेरे भाषण का अर्थ स्पष्ट हो गया होगा और लोग संतुष्ट हो गए होंगे." रोम में इस प्रार्थना सभा के लिए काफ़ी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी. | इससे जुड़ी ख़बरें विवाद के बाद पोप जनता में आएँगे17 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना पोप के बयान पर सकारात्मक प्रतिक्रिया17 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना पोप के बयान पर प्रतिक्रियाएँ15 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना पोप के इस्लाम संबंधी बयान?15 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना पोप बेनेडिक्ट और विवाद!15 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना पोप के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन15 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना पोप की टिप्पणी से मुसलमान नाराज़15 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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