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मंगलवार, 12 सितंबर, 2006 को 03:56 GMT तक के समाचार
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युद्ध के कारण लाखों बच्चे शिक्षा से महरुम
बच्चे
रिपोर्ट के अनुसार संघर्ष वाले इलाक़ों में शिक्षा सहायता मुहैया कराना ज़रुरी है
ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक अलग-अलग देशों में चल रहे सशस्त्र संघर्ष के कारण दुनिया भर में चार करोड़ तीस लाख से ज़्यादा बच्चे प्राथमिक शिक्षा से महरुम हैं.

बच्चों के लिए काम करने वाली चैरिटी संस्था 'सेव द चिल्ड्रेन' ने इस रिपोर्ट के मद्देनज़र बच्चों को प्राथमिक शिक्षा मुहैया कराने के लिए एक विश्वव्यापी अभियान छेड़ा है.

संस्था ने वर्ष 2010 तक ऐसे 30 लाख बच्चों को स्कूलों में दाखिल कराने का लक्ष्य बनाया है. संयुक्त राष्ट्र के सहस्राब्दि विकास लक्ष्यों (एमडीजी) में भी वर्ष 2015 तक प्राथमिक शिक्षा को सर्वसुलभ बनाने की योजना है.

सेव द चिल्ड्रेन के मुताबिक सशस्त्र संघर्ष से प्रभावित क्षेत्रों के बच्चों को शिक्षा का अवसर दिए बिना इन लक्ष्यों को प्राप्त करना मुश्किल है.

प्रभाव

रिपोर्ट के अनुसार हिंसक संघर्षों में मरने या घायल होने वालों में भी सबसे अधिक संख्या महिलाओं और बच्चों की है. दूसरी ओर इन इलाक़ों में शिक्षा के मद में पहुँचने वाली सहायता राशि काफी कम है.

इस चैरिटी संस्था का कहना है कि ऐसे क्षेत्रों में शिक्षा सहायता बढ़ाए जाने की ज़रुरत है.

रिपोर्ट से पता चलता है कि शिक्षा के मामले में जिन देशों का रिकॉर्ड बेहद ख़राब है वहाँ पिछले कुछ वर्षों का इतिहास सशस्त्र संघर्ष का रहा है.

सबसे ख़स्ता हालात कुछ अफ्रीकी देशों का है. सोमालिया में 89 फ़ीसदी बच्चे स्कूल नहीं जाते. यहाँ कई वर्षों से कोई केंद्रीय सत्ता नहीं है.

यही हाल कोंगो का है जहाँ हालिया चुनाव से थोड़ी उम्मीद बँधी है. यहाँ सिर्फ़ 35 प्रतिशत बच्चो की पहुँच प्राथमिक स्कूलों तक है.

दुनिया के निर्धनतम देशों में से एक चाड में लगभग 42 फ़ीसदी बच्चों का दाख़िला नहीं हो सका है.

माओवादी हिंसा के कारण नेपाल में भी 27 प्रतिशत बच्चों को आरंभिक शिक्षा नहीं मिल रही है.

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