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यूरोप हुनर और शिक्षा में एशिया से पीछे | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
आर्थिक सहयोग और विकास सगंठन ओईसीडी की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि शिक्षा और हुनर के मामले में यूरोप एशिया से पिछड़ता जा रहा है. रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत और चीन में लोगों को कम कीमत पर हुनर सीखाए जाते हैं और वो भी बेहद तेज़ गति से. वहीं रिपोर्ट में जर्मनी और फ़्रांस जैसे देशों की शिक्षा प्रणाली की आलोचना की गई है. रिपोर्ट के लेखक एंड्रीयास ने कहा है कि पीछे छूट रहे देशों को शिक्षा में और निवेश करना होगा. उन्होंने दक्षिण कोरिया की भी ख़ास तौर पर प्रशंसा की है. साठ के दशक में दक्षिण कोरिया की राष्ट्रीय आय मैक्सिको जैसे देशों से भी कम थी. पर आज वहाँ 25 से 34 वर्ष के उम्र के 97 फ़ीसदी लोगों ने उच्च शिक्षा हासिल की है. रिपोर्ट में कहा गया है कि यूरोप में सामाजिक-आर्थिक भेदभाव होता है और अमीर तबके के लोगों के पास शिक्षा के ज़्यादा मौके हैं जबकि निचला तबका इससे वंचित रह जाता है. रिपोर्ट के लेखक के मुताबिक यूरोप में शिक्षाविद भी अपना रवैया बदलने को तैयार नहीं है. लेखक के मुताबिक अगर यूरोप को विश्न में प्रतिस्पर्धा में बने रहना है तो उसे शिक्षा पर विशेष ज़ोर देना होगा और अपनी शिक्षा प्रणाली को लचीला और कुशल बनाना होगा. | इससे जुड़ी ख़बरें 35 करोड़ बच्चे बेहद ग़रीब22 अगस्त, 2005 | पहला पन्ना यूनीसेफ़ ने बाल श्रमिकों पर चिंता जताई21 फ़रवरी, 2005 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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