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लेबनान में शांति सैनिकों की तैनाती जल्द | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र शांति सेना की अग्रिम टुकड़ियाँ 10 से 15 दिनों में लेबनान में पहुँचाने की कोशिश कर रहा है. शुरूआत में 3500 सैनिकों की तैनाती की योजना है और इसके बाद इनकी संख्या बढ़ाकर 15 हज़ार तक की जाएगी. उल्लेखनीय है कि संयुक्त राष्ट्र के युद्धविराम प्रस्ताव में शांति सैनिकों की संख्या पर भी सहमति हुई थी. संयुक्त राष्ट्र ने गुरुवार को एक बैठक आयोजित की है जिसमें विभिन्न देशों से शांति सैनिकों में योगदान के लिए वादा लिया जाएगा. दूसरी ओर इसराइल और हिज़्बुल्ला के बीच संघर्ष विराम के बाद हज़ारों लेबनानी वापस अपने घरों को वापस लौटने लगे हैं. दूसरे दिन भी सामान से लदी कारों और ट्रकों की लंबी कतारें लगी हैं. लोग इसराइल की ख़तरे की चेतावनी पर ध्यान नहीं दे रहे हैं. इसराइल विमानों ने पर्चे डाले हैं कि ये इलाक़ा लेबनानी सेना और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षाबलों की तैनाती न हो जाने तक सुरक्षित नहीं है. दूसरी ओर सीरिया और ईरान ने हिज़्बुल्ला की तारीफ़ की है और कहा है कि लड़ाई में इसराइल की हार हुई है. सीरिया के नेता बशर अल असद ने इसे 'शानदार जंग' क़रार दिया है. सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद ने कहा है कि दक्षिणी लेबनान में लड़ाई रुकने और 'हिज़्बुल्ला को मिली जीत से एक नए मध्य पूर्व का उदय' हुआ है. ईरान के राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद का कहना था कि हिज़्बुल्ला ने अमरीका के मध्य पूर्व पर नियंत्रण की योजना को असफल कर दिया है. सोमवार को इसराइल और हिज़्बुल्ला के बीच लागू हुआ युद्धविराम बरकरार है हालांकि कहीं कहीं हिंसा की छिटपुट घटनाएँ हो रही हैं. 'योजना का हिस्सा' सीरियाई राष्ट्रपति ने कहा है कि इस लड़ाई की सबसे बड़ी बात अरब जगत के लोगों की प्रतिक्रिया रही, सबने उन कोशिशों को एक सिरे से ख़ारिज़ कर दिया जिसके तहत हमारे बीच मतभेदों को भड़काने की कोशिश की जा रही थी. उनका कहना था,"एक तरह से लोगों ने ये कह दिया कि हम अरब हैं, ये हमारा विद्रोह है और जो हमारे साथ नहीं हैं वे हमारे लोग नहीं हैं." सीरियाई राष्ट्रपति का कहना था कि लेबनान में जो संघर्ष हुआ वह इसराइल की एक व्यापक योजना का हिस्सा था जो नाकाम हो गई है. बशर अल असद ने कहा कि वर्ष 2000 में उसे लेबनान में विद्रोहियों के हाथों मात मिली थी और फिर उसके साथियों को भी उन कामों में नाकामी मिली जिन्हें इसराइल ने उनको सौंपा था. सीरियाई राष्ट्रपति का कहना था,"लेबनान में हाल की घटनाओं ने ये साबित कर दिया है कि लड़ाई केवल दो इसराइली सैनिकों को छुड़ाने के लिए नहीं हुई बल्कि इसकी तैयारी लंबे समय से चल रही थी." सीरिया में मौजूद एक बीबीसी संवाददाता का कहना है कि सीरियाई राष्ट्रपति जो कुछ कह रहे हैं उसे अरब जगत में बहुत सारे लोग महसूस कर रहे हैं और वो ये है कि अब इसराइल से डरकर रहने की कोई ज़रूरत नहीं रही. विस्थापितों की वापसी सहायता एजेंसियों ने इस बात पर हैरत जताई है कि युद्धविराम लागू होने के तुरंत बाद इतनी बड़ी संख्या में लोग दक्षिणी लेबनान में अपने घरों की ओर लौट रहे हैं.
दूसरे दिन भी सड़कों पर जाम लगा रहा. क्रिश्चियन एड संस्था का कहना है कि हज़ारों लोग बेघर हो चुके हैं. वहीं लेबनान में सरकार ने कहा है कि युद्धविराम को बरकरार रखने के लिए वो अपने हिस्से का काम करने के लिए तैयार है. लेबनानी रक्षा मंत्री ने कहा है कि इस हफ़्ते के अंत तक लितानी नदी के पास करीब 15 हज़ार सैनिक तैनात किए जाएँगे. जबकि इसराइल में सैन्य अधिकारियों का कहना है कि सैनिक एक-दो दिन के अंदर हिज़्बुल्ला के उन ठिकानों से हटना शुरू देंगें जिसपर लड़ाई के दौरान कब्ज़ा किया गया था. | इससे जुड़ी ख़बरें युद्धविराम लागू, विस्थापितों का लौटना शुरू14 अगस्त, 2006 | पहला पन्ना 'सामरिक संतुलन बदलने का दावा'14 अगस्त, 2006 | पहला पन्ना लेबनान में युद्धविराम पर अमल शुरु13 अगस्त, 2006 | पहला पन्ना क्या है लेबनान युद्धविराम का प्रस्ताव?12 अगस्त, 2006 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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