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बुधवार, 02 अगस्त, 2006 को 15:13 GMT तक के समाचार
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'अंतरराष्ट्रीय बल तैनाती तक हमले जारी'
इसराइली सैनिक
इसराइल के उप प्रधानमंत्री शिमॉन पेरेस के अनुसार लड़ाई कुछ ओर हफ़्ते चल सकती है
इसराइल के प्रधानमंत्री एहुद ओल्मर्ट ने कहा है कि जब तक लेबनान में अंतरराष्ट्रीय बल तैनात नहीं किए जाता, वहाँ लड़ाई जारी रहेगी.

एहुद ओल्मर्ट का ये बयान इस ख़बर के बाद आया है जिसमें इसराइली सेना ने पूर्वोत्तर लेबनान के बालबेक नगर पर किए हमले में कई हिज़्बुल्ला चरमपंथियों को पकड़ने का दावा किया है.

सेना का कहना है कि उन्हें पकड़कर इसराइल ले जाया गया है.

इसराइल का जो मकसद था वो ज़्यादातर हासिल हो गया है जिसमें हिज़्बुल्ला के आधारभूत ढाँचे को नष्ट करना शामिल है. दक्षिणी लेबनान में जो लोग हिज़्बुल्ला समर्थक थे वो भी वहाँ से विस्थापित हो गए हैं.
एहुद ओल्मर्ट

इसराइल की सीमा से सौ किलोमीटर उत्तर में स्थित बालबेक में इसराइली सेना और हिज़्बुल्ला चरमपंथियों के बीच भीषण झड़पें हुई हैं. ये क्षेत्र सीरिया से केवल 15 कीलोमीटर की दूरी पर है.

इसराइली सेना ने हवाई हमले के साथ-साथ ज़मीनी कार्रवाई भी की है. ये हमला इसराइली सेना के 48 घंटे के लिए आंशिक रूप से हवाई हमले स्थगित करने के बाद हुआ है.

दक्षिणी लेबनान में इसराइल ने लेबनान की सेना के एक अड्डे पर भी हवाई हमला किया जिसमें तीन लेबनानी सैनिक मारे गए.

इसराइली प्रधानमंत्री एहुद ओल्मर्ट ने कहा है कि उनके मुताबिक इसराइल का जो मकसद था वो ज़्यादातर हासिल हो गया है जिसमें हिज़्बुल्ला के आधारभूत ढाँचे को नष्ट करना शामिल है. उन्होंने कहा कि दक्षिणी लेबनान में जो लोग हिज़्बुल्ला समर्थक थे वो भी वहाँ से विस्थापित हो गए हैं.

लेकिन साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि उनकी सरकार का ये मानना कभी नहीं रहा कि वो उस पर होने वाले हमलों को पूरी तरह से बंद करवा पाएगी.

इसराइली कार्रवाई

इसराइल का अभियान हवाई हमलों से शुरु हुआ और स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार फिर इसराइली सैनिक एक हेलिकॉप्टर के ज़रिए उस इलाक़े में उतरे और एक अस्पताल में दाख़िल हुए.

अस्पताल के निकट उनकी हिज़्बुल्ला लड़ाकों से भिंड़त हुई. इसराइली जेट लड़ाकू विमानों ने अस्पताल के आसपास हिज़्बुल्ला लड़ाकों पर रॉकेट दागे.

इसराइली सेना का कहना है कि लड़ाई में उनका कोई सैनिक घायल नहीं हुआ है.वहीं लेबनान के अधिकारियों का कहना है कि कई आम नागरिक हताहत हुए हैं.

इसराइली थल सेना ने लेबनान में मरून अल रस और टाइबी गाँवों में भी कार्रवाई जारी रखी है.

अलग-अलग मत

लेबनान में चल रहे संघर्ष के चलते हज़ारों लोग विस्थापित हो गए हैं

उधर अमरीका और इसराइल ने इस विषय पर अलग-अलग विचार व्यक्त किए हैं कि लेबनान में इसराइली सैन्य अभियान और कितने दिन चल सकता है.

अमरीकी विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस ने इसराइली उप प्रधानमंत्री शिमॉन पेरेस के साथ बातचीत के बाद कहा कि उनका मानना है कि कुछ ही दिनों में संघर्षविराम संभव है.

उधर इसराइली उप प्रधानमंत्री शिमॉन पेरेस का कहना था कि लड़ाई कुछ हफ़्ते और चल सकती है लेकिन संघर्षविराम कब होगा, इसकी कोई तारीख़ नहीं देना चाहेंगे.

इससे पहले यूरोपीय संघ के विदेश मंत्रियों ने लेबनान में तत्काल लड़ाई बंद करने और इसके बाद वहाँ स्थायी संघर्षविराम का आहवान किया था.

लेकिन उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को स्वीकार्य, पूर्ण रूप से तत्काल संघर्षविराम की बात नहीं कही.

'बहादुर अरब नेता'

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अल ख़मेनेई ने सरकारी टेलीविज़न पर कहा है कि लेबनान में जो भी अपराध हो रहे हैं उसमें अमरीका भी व्यवहारिक रुप से भागीदार है.

उन्होंने कहा कि अमरीका को इस्लामिक देशों की ओर से जबावी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है.

उन्होंने हिज़्बुल्ला नेता शेख नसरुल्ला को एक 'बहादुर अरब नेता' बताया. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि ये बयान इस धारणा को ग़लत साबित करने के लिए दिया गया है कि शेख नसरुल्ला ईरान के हाथ में एक मोहरे की तरह हैं.

दूसरी ओर संयुक्त राष्ट्र के महासचिव कोफ़ी अन्नान ने सुरक्षा परिषद के सदस्यों से कहा है कि वे अपने मतभेद भुलाकर एक ऐसा प्रस्ताव पारित करें जिसमें कड़े शब्दों में लेबनान संकट को ख़त्म करने की बात हो.

कोफ़ी अन्नान ने सुरक्षा परिषद के सदस्यों से तब आहवान किया है जब फ़्रांस के गुरुवार को होने वाली बैठक का बहिष्कार करने की रिपोर्टें आ रही हैं.

इस बैठक में लेबनान के लिए संयुक्त राष्ट्र की मर्ज़ी से तैनात की जाने वाली संभावित सेना में शामिल होने वाले देशों पर चर्चा होनी है.

फ़्रांस के प्रतिनिधियों का कहना है कि जब तक संकट को हल करने के लिए व्यापक बातचीत नहीं हो जाती तब तक ऐसी बैठक करना ग़लत है.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि ऐसा लगता है कि सुरक्षा परिषद के अहम सदस्यों के बीच मतभेदों से कूटनीतिक प्रक्रिया में आगे भी बाधा आ सकती है.

करीब तीन हफ़्तों से चले आ रहे लेबनान-इसराइल संघर्ष के चलते अब तक लेबनान के 750 नागरिक मारे जा चुके हैं. जबकि हिज़्बुल्ला के हमलों में 54 इसराइली लोग मारे जा चके हैं.

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