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चरमपंथी टुंडा कीनिया में पकड़ा गया | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पिछले दो दशकों से भारत और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों की आँखों में धूल झोंक रहा चरमपंथी अब्दुल क़ादिर करीम टुंडा कीनिया में पकड़ा गया है. एफ़बीआई से लेकर आईबी तक दुनिया के कई सुरक्षा एजेंसियों के लिए वह 'मोस्ट वांटेड' चरमपंथी था और कई मामलों में उसकी तलाश थी. वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि टुंडा बम बनाने में माहिर है और माना जाता है कि वह लश्करे तैयबा के प्रमुख बम विशेषज्ञों में से एक है. उसका संबंध चरमपंथी संगठन 'आले हादिस' से है. टुंडा को भारतीय पुलिस और ख़ुफ़िया एजेंसियाँ तब से तलाश रही हैं जब पंजाब में चरमपंथी गतिविधियाँ चल रही थीं. उस समय ट्रेनों और बस अड्डों में किए गए कई बम विस्फोटों में उसका हाथ पाया गया था. कोई एक दशक पहले यह भारतीय पुलिस के हाथ आते-आते बच निकला था. कीनिया में गिरफ़्तारी अब्दुल क़ादिर करीम टुण्डा की गिरफ़्तारी तो कीनिया के मुम्बासा में हुई है. उसके पास से आठ नकली पासपोर्ट बरामद हुए हैं. कीनिया पुलिस का कहना है कि वर्ष 2002 में कीनिया में एक इसराइली होटल में हुए विस्फोट के सिलसिले में भी टुंडा की तलाश थी.
बीबीसी स्वाहिली सेवा से जुड़े पत्रकार ओदियाम्बो जोज़फ़ ने इस बात की पुष्टि की है कि पुलिस रिकॉर्ड में वाक़ई टुण्डा का नाम दर्ज है. ओदियाम्बो जोज़फ़ ने बताया, "अब्दुल क़ादिर करीम टुण्डा को नैरोबी ले जाया गया है. मुम्बासा पोर्ट थाने से रात दो बजे उसे निकाल कर नैरोबी में एफ़बीआई एजेंटों के हवाले कर दिया गया है." ओदियाम्बो जोज़फ़ का कहना है कि आधिकारिक तौर पर इस ख़बर की पुष्टि करने को कोई तैयार नहीं है, लेकिन जब उन्होंने जाँच पड़ताल शुरू की तो काफ़ी जानकारी सामने आई. ओदियाम्बो जोज़फ़ का कहना है कि उन्होंने सरकारी प्रवक्ता डॉक्टर अलफ़्रेड मुतुआ से बात की लेकिन उन्होंने आतंकवाद के आरोपों में किसी भी व्यक्ति की गिरफ़्तारी से इनकार कर दिया. उन्होंने बताया, "लेकिन मैं उस होटल में गया जहाँ संदिग्ध व्यक्ति को गिरफ़्तार करने की ख़बरें आई थीं. होटल के कर्मचारियों ने मुझे बताया कि पुलिस ने उनके होटल में रहने वाले एक आदमी को गिरफ़्तार किया गया." अभी ये जानकारी नहीं मिल पाई है कि जिस व्यक्ति को पिछले एक दशक से भी ज़्यादा समय से भारतीय पुलिस और ख़ुफ़िया एजेंसियाँ तैयार कर रही हैं, वो वास्तव में इस समय किसकी हिरासत में है. ख़तरनाक भारतीय ख़ुफ़िया एजेंसी के पूर्व प्रमुख अरुण भगत का कहना है कि 'अब्दुल करीम टुंडा एक ख़तरनाक आतंकवादी है'. बीबीसी हिंदी से हुई बातचीत में उन्होंने कहा कि टुंडा पिछले 17-18 सालों से इन गतिविधियों में लगा हुआ है. वे बताते हैं, "टुंडा पहले-पहल तब नोटिस में आया जब पंजाब के चरमपंथियों की मदद करके उन्हें देसी बम बनाने की तकनीक सिखाई." उनका कहना है कि उस दौरान पंजाब की ट्रेनों और बस अड्डों में हुए कई विस्फोटों के पीछ टुंडा का ही हाथ माना था. अरुण भगत का कहना है कि टुंडा भागकर बांग्ला देश चला गया था और फिर ख़बर मिली थी कि वह एक विस्फोट में मारा गया. लेकिन इस गिरफ़्तारी से लगता है कि उसके मरने की ख़बरें ग़लत थीं. | इससे जुड़ी ख़बरें मुंबई धमाके: गुप्तचर एजेंसियों पर सवाल14 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस मुंबई धमाके: कौन है शक के दायरे में?12 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस पहले भी हो चुके हैं मुंबई पर हमले11 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस खुफिया तंत्र की विफलता: विशेषज्ञ11 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस मुंबई में सात धमाके, 170 मौतें11 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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